नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता कर लिया है। तीसरी समीक्षा के तहत विस्तारित निधि सुविधा (ईएफएफ) और लचीलापन और स्थिरता सुविधा (आरएसएफ) की दूसरी समीक्षा सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। इससे पाकिस्तान को करीब लगभग 10,200 करोड़ रुपये मिलने का रास्ता खुल गया है।आईएमएफ मिशन की टीम फरवरी 25 से मार्च 2 तक कराची और इस्लामाबाद में पाकिस्तानी अधिकारियों से चर्चा कर चुकी थी, लेकिन शुरुआत में समझौता नहीं हो पाया था। बाद में वर्चुअल बातचीत से सौदा तय हुआ।
IMF और पाकिस्तान के बीच तीसरी समीक्षा समझौता
फंड ने एक बयान के जरिए इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि IMF के कर्मचारियों और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच पाकिस्तान की एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) के तहत तीसरी समीक्षा और रेजिलियंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) के तहत दूसरी समीक्षा पर स्टाफ-स्तरीय समझौता हो गया है।
पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने एक्स पर कहा कि आईएमएफ ने एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी के तहत 37 महीने की एक्सटेंडेड व्यवस्था की तीसरी समीक्षा और रेजिलियंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी के तहत 28 महीने की व्यवस्था की दूसरी समीक्षा पर स्टाफ-स्तरीय समझौता कर लिया है।
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किसको कितना मिलेगा फंड
आईएमएफ मिशन की प्रमुख इवा पेट्रोवा ने कहा कि आईएमएफ बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान को EFF के तहत लगभग $1.0 बिलियन और RSF के तहत लगभग $210 मिलियन मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारी मैक्रो-फाइनेंशियल स्थिरता में हाल में मिली सफलताओं को बनाए रखने के लिए ठोस और समझदारी भरी मैक्रोइकोनॉमिक नीतियां अपनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
साथ ही, वे विकास की गति तेज करने के लिए ढांचागत सुधारों को और गहरा कर रहे हैं, और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सबसे कमज़ोर तबके पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए सामाजिक सुरक्षा को मज़बूत कर रहे हैं।
अर्थव्यवस्था को मजबूत करना मकसद
पाकिस्तान 2024 में IMF के $7 बिलियन के EFF कार्यक्रम में शामिल हुआ था। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, बाजार का भरोसा फिर से कायम करना, राजकोषीय सुधारों को जारी रखना और ऊर्जा क्षेत्र की कमियों को दूर करना है।
पिछले साल, पाकिस्तान को $1.4 बिलियन की रेजिलियंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) मिली थी। इसका मकसद जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता बढ़ाना, आपदा प्रबंधन को मजबूत करना, पानी के इस्तेमाल को और ज्यादा कुशल बनाना और ग्रीन फाइनेंसिंग को बढ़ावा देना है।



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