8 साल बाद मल्हार में सजी सांस्कृतिक महफिल, पहले दिन ही उमड़ा जनसैलाब

8 साल बाद मल्हार में सजी सांस्कृतिक महफिल, पहले दिन ही उमड़ा जनसैलाब

बिलासपुर : ऐतिहासिक नगरी मल्हार में बहुप्रतीक्षित मल्हार महोत्सव की शुरुआत पूरे वैभव, आस्था और सांस्कृतिक ऊर्जा के साथ हुई। आठ वर्षों के अंतराल के बाद लौटे इस महोत्सव ने पहले ही दिन यह संकेत दे दिया कि यह आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक आत्मा का पुनर्जागरण है। मां डिंडेश्वरी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुभारंभ हुआ और पूरे परिसर में उत्साह, श्रद्धा और परंपरा का अनूठा संगम दिखाई दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से पुनः शुरू हुए इस महोत्सव को लेकर स्थानीय स्तर पर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

मेला ग्राउंड में शाम 5:30 बजे से रात 11 बजे तक चले कार्यक्रमों में लोक और शास्त्रीय कला का जीवंत संगम देखने को मिला। करमा नृत्य से शुरुआत हुई, जिसने माहौल को पारंपरिक रंग में रंग दिया। इसके बाद पंथी नृत्य, शास्त्रीय संगीत और ओडिसी नृत्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा। स्वाति सोनी लोककला मंच, शिवकुमार तिवारी और साथियों की प्रस्तुति के साथ सुनील सोनी स्टार नाइट ऑर्केस्ट्रा ने माहौल को चरम पर पहुंचा दिया। हर प्रस्तुति के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया और पूरा परिसर तालियों और सराहना से गूंजता रहा।

इतिहास और परंपरा का मंच पर संगम

मुख्य अतिथि के रूप में शामिल विधायक धरमलाल कौशिक ने मल्हार की ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत को रेखांकित करते हुए कहा कि यह क्षेत्र ताम्रपाषाण कालीन सभ्यता के महत्वपूर्ण साक्ष्य समेटे हुए है। यहां प्राप्त प्राचीन अवशेष, मिट्टी के बर्तन और औजार इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को दर्शाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि महोत्सव का पुनः आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि इस गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का माध्यम है।

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जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की मौजूदगी

कार्यक्रम में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, नगर पंचायत अध्यक्ष धनेश्वरी केवर्त, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने आयोजन को और गरिमा प्रदान की।

कलाकारों का सम्मान, परंपरा को सलाम

महोत्सव के दौरान प्रस्तुतियां देने वाले कलाकारों को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। लोकगीत, लोकनृत्य और रंगारंग प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्सव में बदल दिया। दर्शकों की भागीदारी और कलाकारों की ऊर्जा ने यह साफ कर दिया कि मल्हार महोत्सव केवल आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्सव का जीवंत उदाहरण है।

आज भी जारी रहेगा रंगारंग सिलसिला

महोत्सव के दूसरे दिन भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी रहेगी, जहां एक बार फिर लोक और शास्त्रीय कला का संगम देखने को मिलेगा।









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