नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पेंटागन ने ईरान के खिलाफ सीमित लेकिन अत्यधिक प्रभावी जमीनी अभियानों की विस्तृत तैयारी तेज कर दी है। अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान के भीतर ऐसे सैन्य विकल्पों पर विचार चल रहा है जिनमें पूर्ण पैमाने पर आक्रमण नहीं, बल्कि चुनिंदा रणनीतिक ठिकानों पर त्वरित छापामार कार्रवाई, विशेष बलों की घुसपैठ और सीमित अवधि के कब्जे शामिल हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इन योजनाओं का उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता, तटीय रक्षा ढांचे और ऊर्जा निर्यात तंत्र को कमजोर करना है, ताकि तेहरान पर निर्णायक दबाव बनाया जा सके। महीनों नहीं हफ्तों का छापामार अभियान, खार्ग समेत कई द्वीप निशाने पर अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पेंटागन ने महीनों नहीं, बल्कि हफ्तों की अवधि वाले अभियानों का खाका तैयार किया है।
खार्ग द्वीप पर नजर
इसमें विशेष बलों और पारंपरिक पैदल सेना की तेज कार्रवाई शामिल है, जो लक्ष्य पर प्रहार कर शीघ्र वापसी करेगी ताकि ईरान को लंबी जवाबी लड़ाई का अवसर न मिले। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह अंतिम समय की तैयारी नहीं, बल्कि पहले से कई दौर के युद्धाभ्यासों के बाद तैयार किया गया सैन्य ढांचा है।
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रणनीतिक चर्चा के केंद्र में खार्ग द्वीप है, जो फारस की खाड़ी में ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र माना जाता है। यहां से ईरान के अधिकांश कच्चे तेल का समुद्री निर्यात होता है। अमेरिकी सैन्य योजनाकारों का मानना है कि यदि इस द्वीप पर कब्जा किया जाए या समुद्री नाकेबंदी की जाए तो तेहरान को भारी आर्थिक झटका लगेगा और वार्ता में अमेरिका की स्थिति मजबूत हो सकती है।
इसी तरह लारक द्वीप भी प्रमुख विकल्पों में है, क्योंकि यह होर्मुज जलडमरूमध्य की निगरानी में अहम भूमिका निभाता है। इसके अतिरिक्त अबू मूसा द्वीप और उसके आसपास के छोटे द्वीपों पर भी सैन्य विकल्प तैयार किए गए हैं। इस क्षेत्र पर यूएई भी अपना दावा करता है।
अमेरिकी रणनीति के तहत यहां नियंत्रण स्थापित कर ईरान की समुद्री निगरानी क्षमता सीमित की जा सकती है। एक अन्य विकल्प क्षेत्र में ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों को रोकना और समुद्री निरीक्षण के नाम पर उनके आवागमन को नियंत्रित करना है।
पेंटागन की जमीनी अभियान के साथ बमबारी की भी योजना
रक्षा सूत्रों के अनुसार पेंटागन निर्णायक प्रहार के व्यापक विकल्प पर भी काम कर रहा है। इसमें सीमित जमीनी कार्रवाई के साथ बड़े पैमाने पर बमबारी अभियान जोड़ा जा सकता है।
कुछ योजनाओं में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों तक पहुंचकर उच्च संवर्धित यूरेनियम को सुरक्षित करने की संभावना भी शामिल है, हालांकि बड़े पैमाने पर हवाई हमले को अब भी वैकल्पिक रणनीति माना जा रहा है। अमेरिका ने इसी परिप्रेक्ष्य में पश्चिम एशिया में सैन्य जमावड़ा बढ़ा दिया है। अमेरिकी सेना की पहली मरीन टुकड़ी शुक्रवार को एंफीबियस युद्धपोत के जरिए क्षेत्र में पहुंच चुकी है, जबकि दूसरी टुकड़ी रास्ते में है।
इसके साथ ही 82वीं एयरबोर्न डिवीजन का कमांड तत्व भी भेजा जा रहा है, जिससे त्वरित तैनाती और सीमित अवधि के हमलों की क्षमता बढ़ेगी। इस बीच व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने कहा है कि यदि कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो राष्ट्रपति ट्रंप नरक जैसे हालात बनाने के लिए तैयार हैं।
ईरान की तैयारी महीनों नहीं, वर्षों की
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के पास ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइलें और तटीय रक्षा तंत्र है, जिससे खार्ग या लारक जैसे द्वीप अत्यधिक विवादित युद्धक्षेत्र बन सकते हैं।
पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि किसी द्वीप पर कब्जा करना कठिन नहीं, लेकिन वहां सैनिकों को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती होगी। इसलिए अमेरिकी रणनीति तेज, सीमित और उच्च गतिशीलता वाली कार्रवाई पर आधारित है।



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