मुंबई :फिल्म ‘मेजर’ के बाद अभिनेता अदिवी शेष ने एक बार फिर हिंदी और तेलुगु दोनों भाषाओं में फिल्म ‘डकैत: एक प्रेम कथा’ की है। अभिनय के साथ-साथ फिल्मों का लेखन कर रहे अदिवी की यह फिल्म अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म ‘भूत बंगला’ के साथ प्रदर्शित होने जा रही है। अदिवी से उनकी फिल्म, इसके ‘भूत बंगला’ से टकराव और लेखन व अभिनय के बीच संतुलन पर दीपेश पांडेय की बातचीत के अंश...
इस फिल्म को बनाने के पीछे क्या सोच थी?
सोच तो यही थी कि हम एक प्रेम कहानी ऐसे माहौल में दिखाएं, जो हम सामान्य तौर पर नहीं देखते हैं। पहले जैसे शोले जैसी फिल्मों में हम देखा करते थे वो पत्थर, गोलियां, रेल की पटरी, गर्मी और आग। उन चीजों के बीच में एक गुस्से से भरी प्रेम कहानी।
हमने इसे हिंदी और तेलुगु दोनों ही भाषाओं में अलग-अलग शूटिंग करके बनाई है। मेरे हिसाब से पैन इंडिया नहीं, बाइलिंग्वल (द्विभाषी) फिल्म इसके लिए सही टैग है। हम इसे सिर्फ उन्हीं भाषाओं (हिंदी, तेलुगु) में रिलीज कर रहे हैं, जिनमें हमने शूट किया है।
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दोनों भाषाओं में एक समान हाव-भाव के साथ शूट कर पाने की क्या चुनौतियां रहीं?
चुनौतियां तो रही, क्योंकि एक बार हम साधारण हिंदी में बात कर रहे होते हैं, तो दूसरी जगह ठेठ तेलुगु में। इसलिए हमने पहले तय कर लिया था कि दोनों ही भाषाओं में एक समान इमोशन नहीं दोहराएंगे।
हिंदी में अगर कोई शब्द मजाकिया है, तो हो सकता है कि तेलुगु में उतना मजा ना आए। इसलिए हाव-भाव अलग रखने के साथ ही हमने दोनों भाषाओं में सीन भी अलग-अलग तरीके से दिखाया है। कई छोटे-छोटे रोल्स के लिए तो हमने दोनों भाषाओं में कलाकारों को भी अलग-अलग चुना है।
फिल्म में तू चीज बड़ी है मस्त मस्त.. गाने को रीक्रिएट करने के क्या कारण थे?
पिछली सदी के नौवें दशक का बच्चा होने के कारण मेरा भी बचपन इस गाने की यादों के साथ जुड़ा रहा है। ये वो गाना है, जिस पर मैंने अपने दोस्त के बर्थडे पर पहली बार डांस किया था। मैं बहुत शर्मीला बच्चा हुआ करता था, जब यह गाना बजा तो मेरा भी नाचने का मन करने लगा। इसका मेरे बचपन से जुड़ाव रहा है, इसीलिए हमने यह गाना रीक्रिएट किया। इस गाने के बारे में फिल्म में भी एक कहानी है।
मेजर के बाद हिंदी सिनेमा में स्वीकृति का क्या अहसास हुआ?
मेजर के कारण ही उसके बाद मुझे युद्ध, सेना के जवानों और बायोपिक पर आधारित ढेर सारी फिल्में आफर की हुई। पर मुझे डकैत ही मेरे लिए सही फिल्म लगी, क्योंकि कहानी मेरे लिए बहुत आवश्यक है। अगर हम दिल से काम करें और अच्छी फिल्म बनाए, तो हिंदी दर्शक इतने प्यारे हैं कि किसी भी फिल्म या कलाकार को स्वीकार कर लेते हैं।
धुरंधर: द रिवेंज और टॉक्सिक से टकराव के कारण आपने अपनी फिल्म की रिलीज आगे बढ़ाई, लेकिन अब सामने भूत बंगला आ गई..
हम अपनी फिल्म 19 मार्च को रिलीज करना चाहते थे, क्योंकि उस दिन तेलुगु नव वर्ष था। धुरंधर: द रिवेंज जैसी फिल्म के सामने हमारी फिल्म को हिंदी में पर्याप्त स्क्रीन पाने में समस्या हो रही थी। इसलिए हमने 10 अप्रैल को रिलीज करने का निर्णय लिया।
टकराव का इरादा तो नहीं था, मैं तो अक्षय कुमार का प्रशंसक हूं। मैंने उन्हीं के गाने पर अपनी फिल्म का टीजर काटा है। संयोग की बात है कि पिछली बार मेजर का टकराव अक्षय कुमार की सम्राट पृथ्वीराज से हुआ था, अब डकैत के सामने उनकी भूत बंगला है।
अभिनय और लेखन के बीच किसको ज्यादा समय देना है किसको नहीं, वो संतुलन कैसे बनाते हैं?
मेजर के बाद अगली फिल्म लाने में थोड़ा समय इसलिए भी लगा क्योंकि मैं दो फिल्में लिख रहा था, पहला डकैत और दूसरी जी 2। मैं किसी एक को ज्यादा अहमियत देने के बारे में नहीं सोचता हूं, पर जब मैं लेखन चरण में होता हूं, तो सिर्फ उसके बारे में सोचता हूं और जब एक्टिंग कर रहा होता हूं तो सिर्फ उसके बारे में सोचता हूं
। मैं स्वयं को ऐसा एक्टर मानता हूं, जिसको करियर की शुरुआत में मजबूरी में स्क्रिप्ट लिखना पड़ा। मैंने अपने एक्टिंग करियर को सफल बनाने के लिए लिखना शुरू किया।
इन दिनों इंटरनेट मीडिया और उसकी नकारात्मकता की काफी चर्चा है, आप उनसे कैसे निपटते हैं?
मुझे लगता है कि इंटरनेट मीडिया के कारण हर जगह नकारात्मकता बढ़ चुकी है। उनमें सिनेमा सिर्फ एक चीज है। मुझे लगता है कि अगर लोग फोन या कंप्यूटर स्क्रीन के पीछे छुप न पाते तो ऐसी निगेटिविटी नहीं होती। निगेटिव टिप्पणियां देखकर मुझे भी बुरा लगता है। शुरू में अगर कोई मेरे निजी मामलों या परिवार के बारे में कुछ बुरा लिख देता था, तो आंखों में आंसू आ जाते थे।



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