नई दिल्ली : केरलम के विधानसभा चुनाव में 2021 में हुई चूक से सबक लेते हुए कांग्रेस हाईकमान ने इस बार सूबे के शीर्ष नेताओं के बीच गुटबाजी को लगभग पूरी तरह थाम लिया है।इस कड़ी में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात के बाद सूबे के वरिष्ठ लोकसभा सांसद के.सुधाकरण का पार्टी के चुनाव अभियान में पूरी शिद्दत से शामिल होने का एलान कांग्रेस नेतृत्व के लिए राहत भरा है।
वाम दलों के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार के आक्रामक चुनावी अभियान को देखते हुए चुनाव के दौरान केरलम कांग्रेस की एकजुटता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए अहम चुनौती थी। इसमें संदेह नहीं कि चाहे के सुधाकरण हों या तेजतर्रार सांसद शशि थरूर, वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथेला से लेकर के मुरलीधरन जैसे नेताओं को एकजुट करने की इस पहल में राहुल गांधी ने सबसे अहम सक्रिय भूमिका निभाई है।
विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं देने से नाराज सुधाकरण को साधने की पहल इसका ताजा प्रमाण है। कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन के सत्ता में आने की संभावनाओं को देखते हुए स्वाभाविक रूप से केरलम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राज्य के नेतृत्व के लिए अपनी दावेदारी ठोकने का मौका गंवाना नहीं चाहते।
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इसके मद्देनजर सुधाकरण समेत कुछ अन्य लोकसभा सांसद विधानसभा चुनाव लड़ने का दबाव बना रहे थे, मगर हाईकमान ने सांसदों को विधानसभा टिकट नहीं देने का सैद्धांतिक फैसला कर इन सबकी राह रोक दी। इससे नाराज सुधाकरण कांग्रेस के चुनाव कार्यक्रमों में शरीक नहीं हो रहे थे। कभी वामपंथी दलों का गढ़ रहे कन्नूर और आसपास के जिले में कांग्रेस को ताकतवर बनाने में सुधाकरण की बड़ी भूमिका रही है और उनका प्रभाव भी है।
इसलिए कोई जोखिम नहीं लेते हुए राहुल गांधी ने सीधे सुधाकरण को फोन कर शनिवार को दिल्ली बुलाया। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के अस्पताल में भर्ती होने के कारण राहुल केरल के चुनावी दौरे अभी नहीं कर पा रहे। मल्लिकार्जुन खरगे के साथ उनके आवास पर सुधाकरण की बैठक हुई जिसमें राहुल गांधी व कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल भी शामिल हुए और उन्हें चुनाव में सक्रिय रूप से जुटने के लिए राजी कर लिया गया।
राहुल गांधी ने सुधाकरण और उनके परिवार संग हुई मुलाकात की तस्वीरें एक्स पर साझा कर उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि के.सुधाकरण ने केरलम की जनता के लिए संघर्ष करते हुए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। केरलम कांग्रेस की इस एकजुटता से उत्साहित राहुल गांधी ने इसी पोस्ट में यूडीए के केरलम में 100 सीटों के साथ एक जबरदस्त जीत की ओर बढ़ने का दावा करने से गुरेज नहीं किया।
वस्तुत: केरलम चुनाव में कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से पहली बार एक निश्चित संख्या में सीटें जीतने का दावा किया गया। केरलम का चुनावी मिजाज बीते कई दशकों से हर पांच साल में सत्ता बदलने का रहा था, मगर 2021 में एलडीएफ ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल कर सबको हैरान कर दिया था और यूडीएफ की पराजय की सबसे बड़ी वजह कांग्रेस की गुटबाजी को माना गया था।
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद कई राज्यों के चुनाव में मिली मात को देखते हुए पार्टी हाईकमान केरलम को लेकर इसीलिए सतर्क है और तभी कुछ महीने पहले राहुल गांधी और खरगे ने कांग्रेस की लाइन-लेंथ से इतर चल रहे शशि थरूर को बुलाकर दो घंटे बातचीत कर उनकी नाराजगी दूर की। परिणामस्वरूप शशि थरूर कांग्रेस के प्रचार अभियान में अपनी ऊर्जा झोंक रहे हैं।
इसीतरह केरलम में नेता विपक्ष वीडी सतीशन हों या वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथेला दोनों मुख्यमंत्री पद के लिए उनके उछाले जाने पर कह रहे थे कि कांग्रेस नेतृत्व चुनाव बाद इसका फैसला करेगा। हाईकमान ने जहां सूबे के शीर्ष नेताओं को साध लिया है, वहीं केसी वेणुगोपाल जिला स्तर पर टिकट बंटवारे के बाद स्थानीय नेताओं के असंतोष को थाम टीम कांग्रेस के मैदान में होने का संदेश देने में जुटे हैं।



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