उड़द की खेती करने वाले किसानों के लिए यह मौसम बदलाव वाला थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इससे फसल पर कीटों और रोगों का हमला पैदावार को प्रभावित कर सकता है. कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान ने उड़द की फसल को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. उन्होंने मुख्य रूप से ‘बालदार गिड़ार’ और ‘येलो वैन मोजेक’ की समस्या से फसल को बचाने की सलाह दी है. उनका कहना है कि समय रहते सही कीटनाशकों का प्रयोग और रोगों के प्रसार को रोकने वाली तकनीकें अपनाकर किसान अपनी फसल को भारी नुकसान से बचा सकते हैं और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.
कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि उड़द एक प्रमुख दलहनी फसल है, जिसमें कीट और रोग दोनों का प्रकोप देखा जाता है. उन्होंने विशेष रूप से ‘बालदार गिड़ार’ की पहचान बताई, जिसके शरीर पर बाल होते हैं और यह पत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाती है. इसके नियंत्रण के लिए उन्होंने ‘क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी’ के छिड़काव की सलाह दी. साथ ही, उन्होंने ‘येलो वैन मोजेक’ के बारे में जानकारी दी, जो वायरस के कारण होता है और ‘सफेद मक्खी’ के जरिए फैलता है. डॉ. खान ने इसके बचाव के लिए डाइमेथोएट और क्लोरोपायरीफॉस जैसे रसायनों के संतुलित उपयोग करने की सलाह दी है ताकि वायरस को बढ़ने से रोका जा सके.
ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
बालदार गिड़ार कीट और उसका नियंत्रण
उड़द की फसल में ‘बालदार गिड़ार’ एक गंभीर समस्या है. इस कीट की मुख्य पहचान इसके शरीर पर मौजूद घने बाल हैं, जो इसे अन्य इल्लियों से अलग बनाते हैं. यह कीट पत्तियों को खाकर फसल को कमजोर कर देता है. इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए किसानों को ‘क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी’ का छिड़काव करना चाहिए. समय पर छिड़काव करने से गिड़ार की संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे पौधों की ग्रोथ और फलियों के विकास पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है.
येलो वैन मोजेक रोग और सफेद मक्खी का हमला
उड़द की फसल में ‘येलो वैन मोजेक’ एक घातक वायरस जनित बीमारी है. एक्सपर्ट का कहना है ‘सफेद मक्खी’ इस वायरस के वाहक के रूप में कार्य करती है. जब यह मक्खी एक संक्रमित पौधे का रस चूसकर दूसरे स्वस्थ पौधे पर बैठती है, तो वायरस दूसरे पौधे पर फैल जाता है. इसके कारण पत्तियों पर पीले रंग के धब्बे और धारियां दिखाई देने लगती हैं और धीरे-धीरे पूरी पत्ती पीली पड़ जाती है. इस रोग के प्रसार को रोकने के लिए वाहक कीट यानी सफेद मक्खी का नियंत्रण जरूरी है.
रोगों के बचाव के रासायनिक उपाय
फसल को रोगों से मुक्त रखने के लिए डॉ. हादी हुसैन खान ने कई प्रभावी नियंत्रण के लिए रासायनिक घोल का छिड़काव करने की बात कही है. सफेद मक्खी और अन्य कीटों के नियंत्रण के लिए ‘डाइमेथोएट’, ‘ऑक्सीडेमेटोन मिथाइल’ या ‘क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी’ का छिड़काव करना चाहिए. इन दवाओं के प्रयोग से वायरस फैलाने वाले कीटों का खात्मा होता है और फसल की गुणवत्ता बनी रहती है.



Comments