गर्मी का सीजन शुरू होते ही किसान भाई जायद की फसलों की तैयारी में जोर-शोर से जुट गए हैं. सूरजमुखी की बुवाई का काम लगभग पूरा हो चुका है और खेतों में पौधे अब धीरे-धीरे बड़े होने लगे हैं. सूरजमुखी न केवल देखने में सुंदर होता है, बल्कि इसका तेल स्वास्थ्य के लिए भी वरदान माना जाता है. लेकिन, जायद के मौसम में सबसे बड़ी चुनौती होती है बढ़ता हुआ तापमान. अगर इस समय सिंचाई में थोड़ी भी लापरवाही हुई, तो फसल बर्बाद हो सकती है.आइए जानते हैं सुल्तानपुर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. जे.बी. सिंह से कि सूरजमुखी की सिंचाई का सही वैज्ञानिक तरीका क्या है और किन बातों का ध्यान रखकर आप अपनी कमाई बढ़ा सकते हैं.
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तापमान बढ़ने से पहले सिंचाई है जरूरी
कृषि वैज्ञानिक डॉ. जे.बी. सिंह बताते हैं कि सूरजमुखी की पूरी फसल के दौरान कम से कम 4 से 5 बार सिंचाई करना बहुत जरूरी होता है. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बुवाई के बाद से ही गर्मी और तापमान लगातार बढ़ने लगता है. अगर पौधों को समय पर पानी नहीं मिला, तो गर्मी का इन पर बुरा असर पड़ता है और पैदावार घट जाती है. नियमित सिंचाई करने से पौधों को ठंडा माहौल मिलता है और वे तेजी से विकास करते हैं.
पहली सिंचाई का सही समय
अक्सर किसान भाई इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि पहली सिंचाई कब करें. डॉ. सिंह के अनुसार, सूरजमुखी की बुवाई के ठीक 21 दिन बाद पहली सिंचाई कर देनी चाहिए. यह समय पौधों की जड़ों की मजबूती के लिए सबसे सटीक होता है.इसके बाद, हर 15 दिन के अंतर पर खेत की नमी को देखते हुए सिंचाई करते रहना चाहिए. समय पर पानी देने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं, जड़ें गहराई तक जाती हैं और फसल में रोगों या खरपतवार (घास-फूस) की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है.
खरपतवार से ऐसे पाएं छुटकारा
गर्मी के मौसम में जब तापमान बढ़ता है, तो सूरजमुखी के साथ-साथ खेतों में फालतू घास और खरपतवार भी उगने लगते हैं. ये खरपतवार मिट्टी का सारा पोषण सोख लेते हैं, जिससे मुख्य फसल कमजोर पड़ जाती है. डॉ. सिंह ने इसका एक बहुत ही सरल वैज्ञानिक उपाय बताया है. खरपतवार को जड़ से खत्म करने के लिए आप 660 लीटर पानी में 3.3 लीटर बेंडिमेथिनील (Pendimethalin) का घोल तैयार करें. इस घोल का छिड़काव सूरजमुखी के पौधों पर करें. इससे फसल साफ रहेगी और पौधों को भरपूर पोषण मिलेगा. याद रहे, सिंचाई और खरपतवार का सही प्रबंधन ही सूरजमुखी की खेती में बंपर मुनाफे की गारंटी है.



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