एक बार लगाएं, बार-बार कमाएं: मेहंदी की खेती का बढ़ता क्रेज

एक बार लगाएं, बार-बार कमाएं: मेहंदी की खेती का बढ़ता क्रेज

इत्र नगरी कन्नौज में खेती का स्वरूप लगातार बदल रहा है, जहां किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ मेहंदी की खेती को भी अपनाने लगे हैं. मेहंदी सिर्फ एक साधारण पौधा नहीं, बल्कि किसानों के लिए आय का एक मजबूत स्रोत बन चुका है. कन्नौज में मेहंदी के फूलों से इत्र तैयार किया जाता है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है. यही वजह है कि किसान इसे एक लाभकारी विकल्प के रूप में देख रहे हैं. कन्नौज का इत्र उद्योग देश-विदेश में प्रसिद्ध है और इसमें मेहंदी के फूलों का खास महत्त्व है. मेहंदी के फूलों से बनने वाला इत्र अपनी हल्की और मनमोहक खुशबू के लिए जाना जाता है. बढ़ती मांग के कारण किसानों को मेहंदी की खेती से अच्छा मुनाफा मिल रहा है. स्थानीय इत्र व्यापारी सीधे किसानों से मेहंदी खरीदते हैं, जिससे किसानों को बाजार की चिंता भी कम रहती है.

फसल सुरक्षा में सहायक

मेहंदी का पौधा किसानों के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. इसे खेत की मेड़ (किनारे) पर लगाने से जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा होती है. इसकी घनी झाड़ियां जानवरों को खेत में प्रवेश करने से रोकती हैं. इससे किसानों को अलग से बाड़ लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे उनकी लागत भी कम होती है.

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सिंचाई की जरूरत कम

मेहंदी की छाया अन्य फसलों के लिए भी फायदेमंद साबित होती है. तेज धूप के समय यह पौधा आसपास के वातावरण को संतुलित करता है, जिससे फसलों को अधिक गर्मी से नुकसान नहीं होता. यह मिट्टी की नमी को बनाए रखने में भी मदद करता है, जिससे सिंचाई की आवश्यकता कम हो जाती है. मेहंदी की खेती में लागत अपेक्षाकृत कम आती है और इसकी देखभाल भी आसान होती है. एक बार पौधा लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता रहता है. इससे किसानों को बार-बार नई फसल लगाने का खर्च नहीं उठाना पड़ता. इत्र उद्योग में इसकी स्थिर मांग इसे और भी लाभकारी बनाती है.

क्या बोले कृषि अधिकारी

जिले के डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर संतोष कुमार बताते हैं कि कन्नौज में मेहंदी की खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने के साथ-साथ फसल सुरक्षा का भी प्रभावी उपाय बन रही है. यह खेती न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभा रही है. आने वाले समय में यदि इस दिशा में और प्रोत्साहन मिला, तो मेहंदी की खेती क्षेत्र की पहचान को और मजबूत करेगी.









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