छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) में 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के अधिकारी पुनः नियुक्त किए गए हैं, जो पहले किसी शासकीय विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। यह नियुक्ति विशेष रूप से पूर्व कुलपति के संरक्षण में की गई थी और इसे लेकर राज्य में बेरोज़गार युवाओं के अवसरों पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। वर्तमान में ये वरिष्ठ सलाहकार पहले से पेंशन पर हैं, जिसकी राशि लगभग 1–1.5 लाख रुपये प्रति माह है, और इसके अतिरिक्त उन्हें CSVTU में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में 50–60 हजार रुपये का अतिरिक्त मासिक वेतन भी प्रदान किया जा रहा है। जबकि राज्य में शिक्षित बेरोज़गार युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है, उनके पास आधुनिक तकनीकी और कंप्यूटर ज्ञान होने के बावजूद रोजगार के अवसर सीमित हैं। इसके विपरीत, ऐसे वरिष्ठ सलाहकार वर्तमान तकनीकी आवश्यकताओं और तेजी से काम करने की क्षमता में युवाओं की तुलना में कम सक्षम हैं।
ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर बनाए रखना न केवल प्रशासनिक दक्षता को प्रभावित करता है, बल्कि योग्य युवा कर्मियों के अधिकारों का हरण भी करता है। इस प्रकार यह नियुक्ति स्पष्ट रूप से पूर्व कुलपति के संरक्षण के तहत की गई है, जो रोजगार में निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं कि किसी भी विभाग में एक बार सेवानिवृत्त हो जाने के बाद, 62–65 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ अधिकारियों को दोबारा कार्य पर नहीं रखा जाना चाहिए।
विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य शासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रोजगार में योग्यता, तकनीकी दक्षता और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। बेरोज़गार युवाओं को अवसर प्रदान करना और राज्य में रोजगार सुनिश्चित करना प्रशासन और नीति-निर्माताओं की सामाजिक जिम्मेदारी है। इस नीति पर पुनर्विचार आवश्यक है ताकि पेंशन और अतिरिक्त वेतन पर बैठे वरिष्ठ सलाहकारों के कारण योग्य और दक्ष युवा बेरोज़गार न रहें, और अवसर सीधे उन्हीं को मिलें जो आधुनिक तकनीकी और प्रशासनिक दक्षता के साथ कार्य करने में सक्षम हैं।



Comments