नई दिल्ली: अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने बुधवार 1 अप्रैल को आर्टेमिस-II मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। यह मिशन अपोलो-17 मिशन के बाद चंद्रमा के आसपास पहला मानवयुक्त मिशन है।
322 फीट लंबे स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट ने फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से बुधवार शाम 6:35 बजे (भारतीय समयानुसार 10:35 बजे) पर उड़ान भरी। नासा के इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री रॉकेट में सवार हैं। ओरियन क्रू कैप्सूल इन चारों अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की परिक्रमा कराने के लिए 10 दिनों के सफर पर ले गया है।
हालांकि, मिशन चंद्रमा पर उतरने वाला नहीं है, बल्कि एक 'फ्री-रिटर्न' ट्रैजेक्टरी पर चंद्रमा के चारों ओर घूमकर वापस पृथ्वी पर लौटेगा। मिशन का मेन टारगेट ओरियन स्पेसक्राफ्ट की सिस्टम को गहरे अंतरिक्ष में टेस्ट करना और आगे आने वाले मिशनों के लिए तैयार करना है।
आर्टेमिस-II मिशन
साल 1992 के अपोलो-17 मिशन के जरिए आखिरी बार मानव चंद्रमा पर पहुंचा था। उसके बाद से कोई भी क्रूड मिशन चंद्रमा के पास नहीं गया।
आर्टेमिस कार्यक्रम नासा की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका टारगेट चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करना और मंगल ग्रह पर पहुंचना है।
आर्टेमिस-II इस कार्यक्रम का दूसरा मुख्य मिशन है, जो अपोलो युग के बाद चंद्रमा की ओर पहला क्रूड कदम है।
मिशन में क्यों हुई देरी?
इस मिशन को मूल रूप से 2024 में लॉन्च का प्लान था, लेकिन ओरियन कैप्सूल के हीट शील्ड, हाइड्रोजन लीक और अन्य तकनीकी कारणों के बजह इसे 2026 तक टालना पड़ा। लॉन्च से पहले बैटरी सेंसर और फ्लाइट टर्मिनेशन सिस्टम जैसी समस्याओं को भी हल किया गया।
मिशन के चार क्रू मेंबर्स
आर्टेमिस-II मिशन पर चार अंतरिक्ष यात्री सवार हैं।
रीड वाइसमैन (50 वर्ष, कमांडर): नासा के अनुभवी अंतरिक्ष यात्री और पूर्व आईएसएस कमांडर। टेस्ट पायलट के रूप में उनकी लीडरशिप क्षमता गहरे अंतरिक्ष मिशन के लिए उपयुक्त है।
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विक्टर ग्लोवर (49 वर्ष, पायलट): यूएस नेवी के एविएटर। वे चंद्रमा मिशन पर जाने वाले पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री हैं। उन्होंने स्पेसएक्स क्रू-1 मिशन का अनुभव लिया है।
क्रिस्टिना कोच (47 वर्ष, मिशन स्पेशलिस्ट): महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा सबसे लंबे एकल स्पेसफ्लाइट (328 दिन) का रिकॉर्ड रखने वाली।
जेरेमी हैनसेन (50 वर्ष, मिशन स्पेशलिस्ट): कनाडियन स्पेस एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री। पूर्व फाइटर पायलट, वे चंद्रमा की यात्रा करने वाले पहले कनाडाई हैं।
तीन अमेरिकी सदस्य आईएसएस के अनुभवी हैं, जबकि जेरेमी हैनसेन स्पेसफ्लाइट के लिए नए हैं।
चंद्रमा तक पहुंचने में कितना समय लगेगा?
इन अंतरिक्ष यात्रियों को 10 दिन की यात्रा पर भेजा गया है । अगर सब कुछ सही रहा तो ओरियन कैप्सूल चंद्रमा के पास 6 अप्रैल 2026 को पहुंचेगा। कैप्सूल चंद्रमा की सतह से लगभग 4,000 से 6,000 मील (6,450 से 9,650 किलोमीटर) की दूरी पर सबसे पास पहुंचेगा।
इसके बाद फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी पर कैप्सूल स्वाभाविक रूप से पृथ्वी की ओर लौटेगा। स्प्लैशडाउन 10 अप्रैल 2026 को प्रशांत महासागर में होने की उम्मीद है। कुल यात्रा में अंतरिक्ष यात्री लगभग 6,85,000 मील की दूरी तय करेंगे।
मिशन के 10 दिनों का पूरा प्लान
दिन 1-2: हाई अर्थ ऑर्बिट
लॉन्च के बाद अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की ऊंची कक्षा में रहेंगे। वे ओरियन स्पेसक्राफ्ट की सभी सिस्टम्स की जांच करेंगे। जांच पूरी होने पर ट्रांसलूनर इंजेक्शन (ट्रांसलूनर इंजेक्शन) मैन्यूवर किया जाएगा। यह मैन्यूवर ओरियन के प्रोपल्शन सिस्टम द्वारा किया जाता है, जो स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकालकर चंद्रमा की ओर भेजता है।
दिन 3-4: ट्रांसलूनर ट्रांजिट
इस दौरान अंतरिक्ष यात्री स्पेसक्राफ्ट की निगरानी करते रहेंगे। कैप्सूल चंद्रमा की ओर बढ़ेगा।
दिन 5: चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में एंट्री
इस दिन चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी से मजबूत हो जाएगा। अंतरिक्ष यात्री स्पेससूट का परीक्षण करेंगे, इन्हें पहनने की गति, प्रेशराइजेशन और सीट पर बंधने की कोशिश करेंगे।
दिन 6: लूनर फ्लाईबाय
यह मिशन का सबसे अहम दिन है। कैप्सूल चंद्रमा की परिक्रमा करेगा और सबसे पास पहुंचेगा। अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के देख सकेंगे और डेटा इकठ्ठा करेंगे।
दिन 7-9: वापसी की यात्रा
फ्लाईबाय के बाद फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी पर वापसी शुरू हो जाएगी। इस दौरान गहरे अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोग किए जाएंगे।
दिन 10: री-एंट्री और स्प्लैशडाउन
मिशन के आखरी दिन ओरियन सर्विस मॉड्यूल से अलग होगा और पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 25,000 मील प्रति घंटे (40,230 किमी/घंटा) की गति से प्रवेश करेगा। गर्मी से बचाव के लिए हीट शील्ड अहम भूमिका निभाएगा। अंत में प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन होगा, जहां यूएस नेवी क्रू और कैप्सूल की रिकवरी करेगा।
आर्टेमिस-II की सफलता के बाद नासा का अगला बड़ा कदम आर्टेमिस-III होगा, जो 2027 के लिए निर्धारित है। इस मिशन में ओरियन स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी की कक्षा में लूनर लैंडर से डॉकिंग करेगा। यह डॉकिंग लैंडर को चंद्रमा की सतह तक ले जाने की प्रक्रिया का परीक्षण करेगी।
आर्टेमिस-IV मिशन 2028 की शुरुआत में चंद्रमा पर लैंडिंग का टारगेट है । इसके बाद आर्टेमिस-V भी 2028 के अंत में लैंडिंग कर सकता है। नासा का लक्ष्य वार्षिक लैंडिंग करना और चंद्रमा पर स्थायी बेस (लूनर गेटवे सहित) स्थापित करना है।



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