मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में गेहूं और चने की कटाई के बाद ज्यादातर खेत खाली हो जाते हैं लेकिन किसान चाहें तो इस समय का सही उपयोग करके अतिरिक्त आय कमा सकते हैं. अप्रैल से जून के बीच का समय खेती के लिए सुनहरा मौका माना जा रहा है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय कम अवधि वाली मूंगफली की खेती सबसे बेहतर विकल्प है. यह फसल कम पानी में भी तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है. मूंगफली की उन्नत किस्में करीब 75 से 80 दिनों में तैयार हो जाती हैं. वहीं कुछ किस्में 105 से 110 दिनों में पककर तैयार होती हैं. इसकी पैदावार 25 से 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मिल सकती है.
खंडवा के कृषि सलाहकार नरेंद्र पटेल बताते हैं कि अप्रैल में खेत की साफ-सफाई कर बुवाई शुरू कर देनी चाहिए. जेजीएन-3 और जेजीएन-23 जैसी वैरायटी कम समय में अच्छी उपज देती हैं. एक एकड़ में करीब 7 से 8 किलो बीज पर्याप्त होता है.
सिंचाई और खाद का रखें खास ध्यान
गर्मी के मौसम में फसल को 4 से 5 बार पानी देना जरूरी होता है. यह संख्या जमीन और तापमान के अनुसार बदल सकती है. खेत में देसी खाद और डीएपी का संतुलित उपयोग करने से उत्पादन बढ़ता है. मूंगफली की खेती के लिए हल्की, रेतीली या दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जिसमें जल निकासी अच्छी होती है. इसकी खेती खरीफ और रबी सीजन के बीच में की जाती है.
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खरीफ से पहले मिल जाएगा फायदा
यह फसल इतनी जल्दी तैयार हो जाती है कि जून-जुलाई में होने वाली खरीफ बुवाई से पहले खेत दोबारा खाली हो जाता है. इससे किसान एक ही जमीन से दो बार कमाई कर सकता है.
बाजार में बनी रहती है मांग
मूंगफली की डिमांड बाजार में हमेशा बनी रहती है. ऐसे में किसानों को इसका अच्छा भाव मिल जाता है, जिससे मुनाफा और बढ़ जाता है. अगर किसान सही समय पर योजना बनाएं और मूंगफली की खेती करें, तो गर्मी में खाली पड़े खेत भी कमाई का मजबूत जरिया बन सकते हैं. इसमें नाइट्रोजन स्थिरीकरण द्वारा मिट्टी की उर्वरता में इजाफा करने की क्षमता होती है. इसके दाने, तेल और खली सभी का उपयोग खाद्य और उद्योग आदि में होता है.
प्रमुख नकदी फसल मूंगफली
मूंगफली को प्रमुख नकदी फसल माना जाता है, जो मक्का जैसी फसलों की तुलना में अधिक लाभदायक है. विशेषकर गर्मियों के सीजन में पैदावार अच्छी होती है, इसलिए यह कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने वाली फसल है, जिसे ज्यादा देखरेख की जरूरत नहीं होती है.


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