सुकमा : शुक्रवार को वनमंडलाधिकारी सुकमा सह प्रबंध संचालक, जिला लघु वनोपज संघ द्वारा तेंदूपत्ता सीजन की तैयारियों को लेकर एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में समस्त उपवनमंडलकधिकारी, वनपरिक्षेत्र अधिकारी एवं प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के प्रबंधक तथा पोषक अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़ी सभी प्रमुख गतिविधियों की गहन समीक्षा की गई। विशेष रूप से फड़ मुंशी की नियुक्ति, बुटकाटाई कार्यों की प्रगति, बुटकाटाई मजदूरी भुगतान, तेंदूपत्ता संग्रहण एवं भुगतान व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में यह जानकारी दी गई कि जिले की सभी 25 समितियों में बुटकाटाई कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इस वर्ष जिले में 25 समितियों के अंतर्गत कुल 727 फड़ों के माध्यम से तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य किया जाएगा। साथ ही, इस वर्ष गोगुण्डा में एक नए फड़ का भी शुभारंभ किया गया है, जिससे स्थानीय संग्राहकों को सुविधा एवं रोजगार के अतिरिक्त अवसर प्राप्त होंगे।बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि इस वर्ष भी तेंदूपत्ता का दर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा निर्धारित किया गया है, जिससे संग्राहकों को बेहतर पारिश्रमिक सुनिश्चित हो सके।
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वनमंडलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्धारित मानकों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण तेंदूपत्ता की खरीदी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि संग्राहकों को उचित मूल्य मिल सके। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि तेंदूपत्ता से संबंधित सभी भुगतान पूर्णतः ऑनलाइन माध्यम से किए जाएंगे तथा किसी भी परिस्थिति में नकद भुगतान नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया।
इसके अतिरिक्त, अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए। अवैध फड़ संचालन तथा तेंदूपत्ता के पड़ोसी राज्यों में अवैध परिवहन को रोकने हेतु सतर्कता बढ़ाने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि जिन संग्राहकों के बैंक खाते अभी तक नहीं खुले हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर बैंक खाते खुलवाने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि भुगतान प्रक्रिया सुचारु एवं पारदर्शी बन सके।
सुकमा की अर्थव्यवस्था में तेंदूपत्ता का महत्व
तेंदूपत्ता सुकमा जिले की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है। यह न केवल हजारों वनवासियों और ग्रामीण परिवारों को मौसमी रोजगार प्रदान करता है, बल्कि उनकी आय का प्रमुख स्रोत भी है। तेंदूपत्ता संग्रहण से प्राप्त आय से स्थानीय समुदायों की आजीविका सुदृढ़ होती है तथा क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलता है। अतः इसके सुव्यवस्थित प्रबंधन, पारदर्शी भुगतान व्यवस्था एवं अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है, ताकि अधिकतम लाभ सीधे संग्राहकों तक पहुंच सके।
अंत में, सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि वे तेंदूपत्ता सीजन को सफल, पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने हेतु पूर्ण जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें।


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