नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में युद्ध के हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप बार-बार ईरान को धमकी दे रहे हैं कि वो अपना हथियार डाल डे और होर्मुज स्ट्रेट को खोल दे। लेकिन ईरान न तो सीजफायर के लिए तैयार हो रहा है और न ही होर्मुज खोलने के लिए।
ट्रंप ने धमकी दी कि ईरान के पास समझौता करने और होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए 48 घंटे का वक्त बचा है, वरना उस पर भीषण हमला होगा और पूरे ईरान को नरक कर देंगे। ट्रंप की इस धमकी को ईरान ने एक असहाय, घबराहटपूर्ण, बेतूका और बेवकूफी भरी कार्रवाई बताया।
अमेरिका के लिए खुल जाएंगे नरक के द्वार
ट्रंप के 48 घंटों के भीतर शांति समझौता न होने पर तेहरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की बात को ईरान ने मूर्खतापूर्ण बताया। ईरानी जनरल अली अब्दुल्लाही अलीबादी ने ट्रंप की भाषा में ही चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान पर हमला हुआ, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के लिए "नरक के द्वार" खुल जाएंगे।
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अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले की धमकी
फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरानी जनरल अली अब्दोल्लाही ने चेतावनी दी कि ईरान के बुनियादी ढांचे पर अमेरिका या इजरायल द्वारा किए गए किसी भी हमले के जवाब में पश्चिम एशिया में स्थित सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायली बुनियादी ढांचे पर विनाशकारी हमलों से दिया जाएगा।
अब्दोल्लाही ने कहा, "लगातार हार स्वीकार करने के बाद, अमेरिका के आक्रामक और युद्धप्रिय राष्ट्रपति ने एक हताश, घबराए हुए, असंतुलित और मूर्खतापूर्ण कदम में ईरान के बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय संपत्तियों को निशाना बनाने की धमकी दी है।"
पलभर भी नहीं करेंगे संकोच
अब्दोल्लाही ने कहा कि अगर अमेरिका-इजरायल ईरान पर हमला करते हैं तो ईरानी सशस्त्र बल देश के अधिकारों की रक्षा करने और राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा करने में एक पल के लिए भी संकोच नहीं करेंगे और आक्रमणकारियों को उनकी औकात दिखा देंगे।
और भीषण हो सकता है युद्ध
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने 48 घंटे वाली धमकी से पहले 26 मार्च को ईरान को 10 दिन की समय सीमा दी थी। 6 अप्रैल को इसकी समय सीमा समाप्त होने से ठीक पहले ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को अल्टीमेट दिया है। ऐसे में डेडलाइन खत्म होने तक अगर ईरान समझौता नहीं करता है और अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई करेगा। इससे होर्मुज स्ट्रेट समेत पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध और अधिक भीषण हो सकता है।


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