जहां गूंजी थीं गोलियां, अब गूंजा सम्मान: ताड़मेटला में शहीद स्मारक का लोकार्पण

जहां गूंजी थीं गोलियां, अब गूंजा सम्मान: ताड़मेटला में शहीद स्मारक का लोकार्पण

सुकमा : ताड़मेटला में 6 अप्रैल 2010 के ऐतिहासिक हमले में शहीद हुए 76 वीर जवानों को आज भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर सीआरपीएफ के महानिदेशक श्री ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने ताड़मेटला में निर्मित शहीद स्मारक का उद्घाटन किया। लंबे समय तक नक्सल हिंसा के लिए कुख्यात रहे इस क्षेत्र में पहली बार इतने बड़े स्तर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसने पूरे माहौल को देशभक्ति और सम्मान से भर दिया।

कार्यक्रम में एडीजी छत्तीसगढ़ श्री विवेकानंद सिन्हा, बस्तर आईजी श्री पी. सुंदरराज, आईजी सीआरपीएफ श्री शालिन, सीआरपीएफ डीआईजी श्री आनंद राजपुरोहित, श्री एसके सिंह, कलेक्टर श्री अमित कुमार, जिला सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर सहित सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर वीर जवानों को नमन किया। इस दौरान अधिकारियों ने कहा कि शहीदों का बलिदान देश की सुरक्षा और एकता का अमूल्य आधार है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

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कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि ताड़मेटला अब शांति और विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि गांव में विकास को गति देने के लिए बीटी रोड निर्माण हेतु 4 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिसका कार्य एक माह के भीतर प्रारंभ हो जाएगा। साथ ही पीएम आवास योजना के तहत 50 से अधिक घरों का निर्माण जारी है, जिससे ग्रामीणों को सुरक्षित और स्थायी आवास उपलब्ध हो रहा है। प्रशासन द्वारा गांव में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी तेजी से किया जा रहा है। पंचायत भवन, पीडीएस भवन और प्राथमिक स्कूल का निर्माण प्रारंभ हो चुका है, जबकि आगामी महीनों में दो स्कूल और तीन आंगनबाड़ी केंद्र अपने नए भवनों में संचालित होंगे। इसके अलावा गांव से ही राशन वितरण की व्यवस्था शुरू कर दी गई है, जिससे ग्रामीणों को अब दूर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

जल जीवन मिशन के अंतर्गत ताड़मेटला के सभी घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। यह बदलाव दर्शाता है कि जिस ताड़मेटला में कभी भय और हिंसा का साया था, वहां अब प्रशासन की सक्रियता और विकास योजनाओं के माध्यम से शांति, विश्वास और प्रगति की नई शुरुआत हो चुकी है। शहीद स्मारक अब न केवल बलिदान का प्रतीक है, बल्कि नए ताड़मेटला के उज्ज्वल भविष्य का संदेश भी दे रहा है।








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