नई दिल्ली: इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भले ही अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध जल्दी खत्म हो जाए, लेकिन इसके बाद भी ग्रोथ की रफ्तार धीमी होगी और महंगाई में बढ़ोतरी देखी जाएगी। रॉयटर्स को उन्होंने बताया कि IMF 14 अप्रैल को 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' में औपचारिक रूप से अपना संशोधित अनुमान पेश करेगा।
ग्लोबल तेल सप्लाई में 13 प्रतिशत की आई कमी
अब तक हुए नुकसानों की बात करें तो ग्लोबल तेल सप्लाई में 13 प्रतिशत की कमी आई है। पूरे विश्व में गैस की खेप में देरी हो रही है। सप्लाई चेन पर दबाव है। कीमतें बढ़ रही हैं। इसका ज्यादातर हिस्सा ईरान द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को प्रभावी ढंग से ब्लॉक करने से जुड़ा है। यह एक संकरा रास्ता है, जिससे दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस व्यापार होता है।
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जॉर्जीवा ने आगे कहा, "अब सभी रास्ते ऊंची कीमतों और धीमी ग्रोथ की ओर ही जाते हैं।" वैसे हाल तक, IMF को उम्मीद थी कि वह अपने ग्लोबल ग्रोथ के अनुमान को थोड़ा बढ़ाकर 2026 में 3.3 प्रतिशत और 2027 में 3.2 प्रतिशत कर देगा, क्योंकि अर्थव्यवस्थाएं महामारी से उबर रही थी। हालांकि, पिछले एक महीने में युद्ध ने IMF के नजरिए को बदल दिया है।
ऊर्जा संकट से सभी सेक्टर प्रभावित
युद्ध के कारण पैदा हुई रुकावट सिर्फ तेल तक ही सीमित नहीं है। जॉर्जीवा ने कहा कि इसका असर गैस, हीलियम, उर्वरक और अन्य संबंधित सप्लाई चेन तक फैल गया है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने 72 एनर्जी सुविधाओं को हुए नुकसान की रिपोर्ट दी है। इनमें से एक-तिहाई को काफी नुकसान पहुंचा है।
यहां तक कि एनर्जी निर्यात करने वाले देश भी इससे अछूते नहीं हैं। ईरान के हमलों से कतर में उत्पादन सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। देश को अपनी प्राकृतिक गैस उत्पादन का 17 प्रतिशत हिस्सा बहाल करने में तीन से पांच साल लग सकते हैं। युद्ध से एनर्जी आयात करने वाले देशों को सबसे पहले नुकसान होता है यह बात सच है, लेकिन निर्यात करने वाले देश भी इसके बाद के झटकों को महसूस करते हैं।


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