नई दिल्ली : पाकिस्तान में ईसाई लड़की की जबरन शादी पर ब्रिटिश संसदीय दल ने गहरी चिंता जताई है। ईसाई लड़की मारिया शहबाज को अगवा कर जबरन शादी करा दी गई थी। लड़की के पिता ने कहा है कि मारिया शादी के समय नाबालिग थी और उसका जबरन मतांतरण कराया गया। इसके बावजूद पाकिस्तान की संघीय संवैधानिक अदालत द्वारा मारिया शहबाज की शादी को वैध करार दिया था।क्रिश्चियन टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में ईसाई और हिंदू समुदायों की लड़कियों के साथ वर्षों से बुजुर्ग मुस्लिम दुष्कर्म, मतांतरण का निशाना बनाते रहे हैं और हिंदू, ईसाई लड़कियों को शादी के लिए मजबूर किया जाता रहा है।
'अदालतें करती हैं अपरहरणकर्ताओं का समर्थन'
पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों के लिए सर्वदलीय संसदीय समूह (एपीपीजी) ने बयान में कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से ईसाई और हिंदू समुदायों की लड़कियों के अपहरण, मतांतरण और विवाह से संबंधित आरोपों का व्यापक पैटर्न रहा है। ऐसे मामलों में अल्पसंख्यकों को न्याय पाने में अक्सर कानूनी और सामाजिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जबकि अदालतें अक्सर अपहरणकर्ताओं का समर्थन करती हैं।
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पाकिस्तान से कानूनों को लागू करने का आग्रह
एपीपीजी के सह-अध्यक्ष लार्ड आल्टन ने कहा, बच्चों की सुरक्षा और धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा मान्यता प्राप्त मूलभूत सिद्धांत हैं। जबरन विवाह और मतांतरण के आरोप मामलों में न्याय सुनिश्चित करने और न्याय होते हुए दिखने के लिए उच्चतम स्तर की जांच, पारदर्शिता और संवेदनशीलता जरूरी है।
ब्रिटिश समूह ने पाकिस्तानी सरकार से जबरन शादी के आरोपों, विशेषकर नाबालिगों से जुड़े मामलों की जांच करने और कानूनों को लागू करने का आग्रह किया।
क्रिश्चियन टुडे की रिपोर्ट के अनुसार संसदीय समूह ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी मांग की।
पिछले सप्ताह एपीपीजी ने उन रिपोर्टों पर भी चिंता जताई थी कि इस्लामाबाद का कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी (सीडीए) बस्तियों को निशाना बनाकर विध्वंस अभियान की तैयारी कर रहा है, जिनमें मुख्य रूप से कम आय वाले ईसाई परिवार रहते हैं।


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