किरंदुल : लौह नगरी की राजनीति इन दिनों उबाल पर है। विधायक प्रतिनिधि की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब फर्जी हस्ताक्षर कांड तक पहुंच गया है, जिससे पूरे नगर में सनसनी फैल गई है।
विवाद के केंद्र में रहे पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह ने हालात को भांपते हुए बड़ा राजनीतिक दांव खेला और स्वयं ही पद से इस्तीफा देकर एक परिपक्व रणनीतिकार होने का संदेश दिया। उनके इस कदम को जहां समर्थकों ने “साफ-सुथरी राजनीति” की मिसाल बताया, वहीं विरोधी अब भी हमलावर बने हुए हैं।
लेकिन इसी बीच मामले ने उस समय नया और गंभीर मोड़ ले लिया, जब कलेक्टर कार्यालय को भेजे गए एक शिकायत पत्र में नगर के प्रतिष्ठित व्यापारी राज प्रसाद और संजय सोनी के नाम सामने आए। इस पत्र में शैलेंद्र सिंह की नियुक्ति का विरोध दर्ज कराया गया था।
हालांकि, दोनों ही व्यापारियों ने मीडिया के सामने आकर इस पूरे मामले को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि उनके शैलेंद्र सिंह से पारिवारिक संबंध जैसे आत्मीय रिश्ते हैं और वे कभी इस तरह की शिकायत नहीं कर सकते।
दोनों का आरोप है कि किसी ने जानबूझकर उनके नाम का दुरुपयोग करते हुए फर्जी हस्ताक्षर कर शिकायत पत्र तैयार किया है, जो न सिर्फ निंदनीय बल्कि एक गंभीर अपराध भी है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके।
फिलहाल, इस्तीफे के बाद भी शांत होने की बजाय किरंदुल की राजनीति और ज्यादा गरमा गई है। फर्जीवाड़े के इस खुलासे ने प्रशासन और जनता दोनों के सामने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजरें जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।


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