हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत सबसे कठिन और फलदायी माना जाता है। इस बार वैशाख मास की 'वरुथिनी एकादशी' को लेकर लोगों के मन में सबसे ज्यादा उलझन 'नमक' को लेकर है।अक्सर घरों में बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि व्रत में नमक नहीं खाना चाहिए। लेकिन, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कमजोरी से बचने के लिए लोग सेंधा नमक का सहारा लेते हैं। क्या सेंधा नमक खाने से व्रत टूट जाता है?
नमक को लेकर क्या है असली नियम?
एकादशी व्रत के दौरान खान-पान को लेकर 'पद्म पुराण' और 'भविष्य पुराण' जैसे शास्त्रों में काफी विस्तार से बताया गया है।
सादा नमक क्यों है वर्जित?
समुद्र से मिलने वाला सादा नमक फैक्ट्रियों में रिफाइन होता है और इसमें कई तरह के केमिकल प्रोसेस किए जाते हैं। शास्त्रों में इसे 'संस्कारित' भोजन की श्रेणी में रखा गया है, जो व्रत की पवित्रता को कम कर सकता है।
सेंधा नमक का लॉजिक
सेंधा नमक पूरी तरह प्राकृतिक होता है। यह पहाड़ों से सीधे मिलता है, इसलिए इसे 'शुद्ध' माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, अगर आप बीमार हैं या बिल्कुल बिना नमक के नहीं रह सकते, तो विकल्प के तौर पर सेंधा नमक लिया जा सकता है।
अन्न का पूर्ण त्याग
एकादशी पर सबसे बड़ा नियम 'अन्न' (चावल, गेहूं, दाल) का त्याग है। 'पद्म पुराण' में लिखा है कि इस दिन अन्न में पाप का वास होता है, इसलिए नमक से ज्यादा जरूरी अन्न से बचना है।
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वरुथिनी एकादशी की खास पाबंदी: इस एकादशी पर नमक के साथ-साथ कुछ और चीजों की भी मनाही है। जैसे इस दिन कांसे के बर्तन में खाना, शहद, और मसूर की दाल का सेवन करने से व्रत का फल नष्ट हो जाता है।
शास्त्रों का सार यही है कि व्रत केवल शरीर को भूखा रखने के लिए नहीं, बल्कि मन को शुद्ध करने के लिए होता है। अगर आपकी सेहत इजाजत नहीं देती और नमक न खाने से आपको चक्कर आ रहे हैं, तो आप सेंधा नमक का इस्तेमाल करके अपना ध्यान भगवान विष्णु की भक्ति में लगा सकते हैं। मजबूरी में लिया गया आहार व्रत को खंडित नहीं करता, बशर्ते आपका मन साफ हो।


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