टमाटर एक ऐसा सब्जी है, जिसकी मार्केट में डिमांड हमेशा होती है. किसान साल भर इसका उत्पादन कर सकते हैं. अगर आप गर्मी के दिनों में टमाटर उगाते हैं, तो उसकी कीमत 80 से 100 किलो पहुंच जाती है. आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि कम लागत में टमाटर से कितना अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है. टमाटर में काफी अधिक लागत नहीं लगती है और इसका उत्पादन भी ठीक-ठाक होता है.
गर्मी में टमाटर की खेती को लेकर किसानों के मन में अक्सर डर बना रहता है, लेकिन सही समय, सही किस्म और आधुनिक तकनीक अपनाकर यही खेती कमाई का बड़ा जरिया बन सकती है. अगर किसान फरवरी में नर्सरी तैयार कर मार्च तक रोपाई कर लेते हैं, तो अप्रैल-मई की तेज गर्मी में भी टमाटर की बंपर पैदावार ली जा सकती है. वहीं गर्मियों में टमाटर की कीमत बढ़ जाती है, जिससे किसानों को ज्यादा मुनाफा मिलता है.
ऐसे में गर्मी में टमाटर की सफलत खेती बड़ा फायदा करा सकती है. खेत की तैयारी इस खेती की सबसे अहम कड़ी होती है. अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी का भुरभुरा और उपजाऊ होना जरूरी है, इसलिए खेत की 3-4 बार जुताई करनी चाहिए. अंतिम जुताई के समय गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को जरूरी पोषण मिलता है. इससे टमाटर के फल बड़े, चमकदार और मजबूत बनते हैं, जो बाजार में अच्छे दाम दिलाते हैं.
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टमाटर के पौधों को अगर सही पोषण शुरू से मिले तो वे जल्दी बढ़ते हैं और फल भी जल्दी लगते हैं. इसके लिए खेत की जुताई अच्छे से करनी चाहिए और उसमें गोबर की सड़ी हुई खाद, नीम की खली और थोड़ा सा सुपर फॉस्फेट मिलाना चाहिए. अगर किसान ड्रिप सिंचाई सिस्टम का इस्तेमाल करें तो पौधों की जड़ों तक सीधा पानी और खाद पहुंचाया जा सकता है. इससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं.
गर्मी में टमाटर की खेती के लिए सही हाइब्रिड किस्म का चयन करना बहुत जरूरी है. सिंजेंटा 6242 जैसी किस्में ज्यादा उत्पादन देती हैं और रोगों के प्रति सहनशील होती हैं. वहीं, हिमशिखर किस्म गर्मी और बदलते मौसम को सहन कर लेती है और काशी विशेष कम समय में तैयार होकर जल्दी मुनाफा देती है. इन किस्मों के इस्तेमाल से किसान प्रति हेक्टेयर 50 से 90 टन तक उत्पादन ले सकते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ अच्छे बीज से ही काम नहीं चलता, बल्कि आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल भी जरूरी है. ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग पेपर का उपयोग करने से पानी की बचत होती है और मिट्टी की नमी बनी रहती है. इससे फसल पर गर्मी का असर कम पड़ता है और उत्पादन 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है.
गर्मी में फसल की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है. तेज धूप और लू से बचाने के लिए समय-समय पर सिंचाई करना, कीट और रोग नियंत्रण के लिए दवाइयों का छिड़काव करना और संतुलित खाद (NPK) देना जरूरी है. टमाटर की फसल में फली छेदक की समस्या होती है. इसके लिए किसानों को कीटनाशक और फफूंद नाशक दवा का प्रयोग करना बेहद जरूरी है.
इसके बीज उपचार हेतु किसान नटीभो व अन्य कीटनाशक दवा से उपचार कर सकते हैं. इसके बाद बिचड़ा होने के 20 से 25 दिन पर दोबारा बीज उपचार अवश्य करें, जिससे फली छेदक व अन्य कीट के समस्या से बचा जा सकती है. सही देखभाल से एक पौधे से 5 से 8 किलो तक टमाटर उत्पादन मिल सकता है.
अगर किसान सही प्लानिंग और तकनीक के साथ टमाटर की खेती करें, तो गर्मी का मौसम भी उनके लिए नुकसान नहीं बल्कि कमाई का सुनहरा अवसर बन सकता है. किसान टमाटर की खेती कर आप अच्छी कमाई कर सकते हैं. टमाटर की खेती करना आसान है, बस इसकी खेती के दौरान कुछ चीजें ध्यान में रखनी चाहिए.


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