ट्रंप प्रशासन को खुली चुनौती, पोप लियो ने दिया बड़ा बयान

ट्रंप प्रशासन को खुली चुनौती, पोप लियो ने दिया बड़ा बयान

वॉशिंगटन: अमेरिका में जन्मे पोप लियो ने सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन पर किए गए तीखे हमलों का जवाब दिया। ट्रंप ने ईरान में अमेरिका-इजरायल युद्ध को लेकर पोप पर निशाना साधा था। पोप ने पत्रकारों से कहा कि शांति और सुलह के लिए वेटिकन की अपीलें Gospel पर आधारित हैं और उन्हें ट्रंप प्रशासन से कोई डर नहीं है। अल्जीरिया जाते समय पोप के विमान में एसोसिएटेड प्रेस (AP) से बात करते हुए लियो ने कहा, "मेरे संदेश को उस चीज के बराबर समझना, जो राष्ट्रपति ने यहां करने की कोशिश की है, मुझे लगता है कि यह Gospel के संदेश को ना समझना है और मुझे यह सुनकर दुख हुआ, लेकिन मैं उस काम को जारी रखूंगा जिसे मैं आज दुनिया में चर्च का मिशन मानता हूं।"

'ट्रंप या किसी और पर हमला नहीं कर रहे'

अमेरिका में जन्मे पोप ने जोर देकर कहा कि शांति के लिए अपनी आम अपील और सर्वशक्तिमान होने के भ्रम की आलोचना के जरिए वह ट्रंप या किसी और पर सीधा हमला नहीं कर रहे हैं। लियो ने कहा, "मैं किसी बहस में नहीं पड़ूंगा। जो बातें मैं कहता हूं, उनका मकसद निश्चित रूप से किसी पर हमला करना नहीं होता। उन्होंने कहा, "मैं Gospel का संदेश सुनाने और सभी लोगों को शांति और सुलह के पुल बनाने के तरीके खोजने और जब भी संभव हो युद्ध से बचने के तरीके खोजने के लिए आमंत्रित करने से पीछे नहीं हटूंगा।"

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ट्रंप ने की थी पोप की आलोचना

इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लियो पर जबरदस्त हमला बोला था। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कैथोलिक चर्च के अमेरिका में जन्मे वैश्विक नेता बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पोप को कट्टर वामपंथियों को खुश करना बंद कर देना चाहिए। फ्लोरिडा से वॉशिंगटन लौटते समय, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर लियो की कड़ी आलोचना की थी। विमान से उतरने के बाद भी उन्होंने कहा था कि वो पोप लियो के प्रशंसक नहीं हैं।

पोप को समझदारी से काम लेना चाहिए: ट्रंप

ट्रंप ने यह भी कहा कि मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो अमेरिका के राष्ट्रपति की आलोचना करे, क्योंकि मैं ठीक वही कर रहा हूं जिसके लिए मुझे भारी बहुमत से चुना गया था। उन्होंने कहा, "अगर मैं व्हाइट हाउस में ना होता, तो लियो वेटिकन में ना होते।" उन्होंने कहा कि लियो को एक पोप के तौर पर अपनी भूमिका ठीक से निभानी चाहिए, समझदारी से काम लेना चाहिए, कट्टरपंथी वामपंथियों को खुश करना बंद करना चाहिए और एक राजनेता बनने के बजाय एक महान पोप बनने पर ध्यान देना चाहिए।








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