किसानों के लिए अलर्ट: फॉल आर्मीवर्म से मक्का फसल को खतरा, ऐसे करें कंट्रोल

किसानों के लिए अलर्ट: फॉल आर्मीवर्म से मक्का फसल को खतरा, ऐसे करें कंट्रोल

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में मक्के की फसल पर ‘फॉल आर्मीवर्म’ नाम का घातक कीट अटैक कर रहा है. मक्का किसानों के लिए यह कीट एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, क्योंकि यह सीधे पौधे की ‘गोभ’ यानि पौधे के अंदरूनी कोमल हिस्से को निशाना बनाता है. इससे न केवल फसल की ग्रोथ रुक जाती है, बल्कि पैदावार में भी भारी गिरावट आने की आशंका है. कृषि एक्सपर्ट ने किसानों को सतर्क रहने और इस कीट की रोकथाम के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी है.

कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि ‘फॉल आर्मीवर्म’ एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का ‘क्वारंटाइन पेस्ट’ है, जो मक्के की फसल के लिए अत्यंत विनाशकारी है. यह कीट पौधे की गोभ में जाकर उसे अंदर से खा जाता है और वहीं अपना मलमूत्र त्यागता है, जिससे इसकी मौजूदगी का पता चलता है. कीट के नियंत्रण के लिए एक विशेष ‘जहरीला चारा’ बनाने की विधि बताई है. इसमें 10 किलो भूसे को 2 लीटर पानी और गुड़ के साथ 24 घंटे भिगोकर, उसमें 100 ग्राम ‘थायोडिकार्ब’ मिलाकर छोटी गोलियां बनाई जाती हैं और उन्हें शाम के समय मक्के की गोभ में डाला जाता है.

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मक्के की फसल में लगने वाला फॉल आर्मीवर्म एक ऐसा कैटरपिलर है, जो बेहद कम समय में पूरी फसल को तबाह करने की क्षमता रखता है. इसकी पहचान का मुख्य तरीका यह है कि यह पौधे की गोभ को काटकर उसे डैमेज कर देता है. किसान जब पौधे की जांच करते हैं, तो उन्हें गोभ के अंदर कीट का बीट या मलमूत्र दिखाई देता है, जो इस बात का पक्का सबूत है कि फसल इस कीट की चपेट में आ चुकी है.

कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि इस कीट के जीवन चक्र में 5 से 6 अवस्थाएं होती हैं. जैसे-जैसे इल्ली बड़ी होती जाती है, इसका नियंत्रण करना उतना ही कठिन हो जाता है. अंतिम चरण की इल्लियां सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती हैं और उन पर सामान्य कीटनाशकों का असर भी कम होता है. इसलिए, शुरुआत में ही इसकी पहचान करना और समय पर इसकी रोकथाम करना जरूरी है.

एक्सपर्ट ने कम लागत में प्रभावी नियंत्रण के लिए ‘पॉइजन बेट’ विधि का सुझाव दिया है. इसके लिए 10 किलो भूसे को 2 लीटर पानी में गुड़ मिलाकर 24 घंटे के लिए छोड़ दें. इसके बाद इसमें 100 ग्राम ‘थायोडिकार्ब’ नामक दवा मिलकर अगले 48 घंटों के बाद इसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें. इन गोलियों को शाम के समय पौधे के प्रभावित हिस्सों में डालने से कीट का प्रभावी खात्मा हो जाएगा.

अगर किसान जहरीला चारा बनाने में असमर्थ हैं, तो वे वैकल्पिक तौर पर ‘इमामेक्टिन बेंजोएट’ (Emamectin Benzoate) नाम के कीटनाशक का छिड़काव भी कर सकते हैं. यह कीटनाशक विशेष रूप से काटने और कुतरने वाले कीटों के लिए बहुत प्रभावी मानी जाती है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से रोकथाम के लिए उपाय करें. सही समय पर किए गए उपाय से किसान फसल से अच्छा उत्पादन ले सकते हैं.

 

 








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