अप्रैल का महीना किसानों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल रहा है. जायद सीजन में उड़द की खेती कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली फसल साबित हो सकती है. खास बात यह है कि यह फसल 60 से 70 दिनों में तैयार होकर किसानों को अच्छा उत्पादन देती है. वहीं गेहूं की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों का सही उपयोग करते हुए किसान आसानी से उड़द की बुवाई कर सकते हैं, जिससे उनकी आय में अतिरिक्त बढ़ोतरी संभव है. सतना और आसपास के क्षेत्रों में भी किसान इस फसल की कटाई के बाद खूब खेती करते हैं. इसे अल्पकालिक फसल को किसान 20 अप्रैल तक आईपीयू 2-43 विराट, पंत उड़द-31 और शिखर आजाद जैसी उन्नत किस्मों की बुवाई कर सकते हैं. बीज दर 8 से 9 किलो प्रति एकड़ रखी जाती है, जिससे कम लागत में अच्छी पैदावार मिलती है. यह फसल न केवल बाजार में अच्छी कीमत दिलाती है बल्कि कम समय में तैयार होने के कारण जोखिम भी कम रहता है.
उड़द की बेहतर पैदावार के लिए खेत की अच्छी तैयारी बेहद जरूरी है. किसानों को दो बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बनानी चाहिए. प्रति एकड़ 20 किलो डीएपी और 10 किलो सल्फर का बेसल डोज देना फायदेमंद रहता है. बुवाई से पहले बीजों को दो ग्राम प्रति किलो थायरम और राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना चाहिए ताकि अंकुरण अच्छा हो. कतार से कतार की दूरी 25 सेमी और बीज की गहराई 4 से 6 सेमी रखना उचित रहता है.
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सिंचाई और देखभाल से बढ़ेगी पैदावार
अप्रैल में तापमान अधिक होने के कारण बुवाई के तुरंत बाद सिंचाई करना जरूरी है. इसके बाद हर 7 से 10 दिनों के अंतराल पर नमी बनाए रखना चाहिए. खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 48 घंटे के भीतर पेंडिमेथालिन का छिड़काव किया जा सकता है. कीट प्रबंधन में सफेद मक्खी और रस चूसक कीटों से बचाव के लिए 20-25 दिन बाद इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव लाभकारी होता है. फूल आने के समय 2% यूरिया या एनपीके का स्प्रे उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है.
विशेषज्ञ की सलाह और संभावित उत्पादन
जय श्रीकृषि विकास केंद्र सतना से विशेषज्ञ अमित सिंह ने बताया कि एक एकड़ में लगभग 7 से 8 किलो बीज पर्याप्त होता है. सही प्रबंधन के साथ किसान प्रति एकड़ 8 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने यह भी सलाह दी कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में बुवाई करने वाले किसान पीला मोजेक वायरस प्रतिरोधी किस्मों का चयन जरूर करें ताकि मानसून के प्रभाव से फसल सुरक्षित रहे.
मिट्टी की उर्वरता और पोषण का खजाना
उड़द की खेती का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है. इसकी जड़ों में मौजूद ग्रंथियां वायुमंडल से नाइट्रोजन को सोखकर मिट्टी में स्थिर करती हैं, जिससे अगली फसल के लिए उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है. साथ ही उड़द प्रोटीन, विटामिन बी, कैल्शियम और मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत है.
सतना और आसपास के क्षेत्रों जैसे- रामपुर, अमरपाटन और मैहर में उड़द की खेती तेजी से बढ़ रही है. जहां सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था है, वहां किसान इस फसल से अच्छा लाभ कमा रहे हैं. समय पर बुवाई और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान न केवल अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं बल्कि खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं.


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