करेले की इन 3 किस्मों से होगी बंपर कमाई, गर्मी में किसानों के लिए मौका

करेले की इन 3 किस्मों से होगी बंपर कमाई, गर्मी में किसानों के लिए मौका

देश में ग्रीष्मकालीन सीजन शुरु हो चुका है और इस मौसम में किसान भाइयों को ऐसी फसलों की तलाश रहती है, जिनकी बाजारों में भी अधिक मांग रहती है, ताकि वे इन फसलों की खेती कर अच्छी आय कमा सकें. ऐसे में किसानों के लिए करेले की ICAR द्वारा विकसित यह टॉप किस्में पूसा हाइब्रिड-6 (DBGH-542),पूसा हाइब्रिड-5, पूसा हाइब्रिड-4 (डी. बी. जी. एच.-12) मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है. 

आगे कड़ी में जानें करेले की इन टॉप-3 किस्मों के बारे में विस्तारपूर्वक-

पूसा हाइब्रिड-6 (DBGH-542)

करेले की यह किस्म एक उन्नत और संकर (Hybrid) किस्म है, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) नई दिल्ली द्वारा विकसित किया गया है. अगर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली (NCR) जैसे क्षेत्रों के किसान इस किस्म की बुवाई करते हैं, तो 44-48 दिनों के भीतर 34.04 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर तगड़ी आय अर्जित कर सकते हैं.

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पूसा हाइब्रिड-5

पूसा हाइब्रिड-5 करेले की किस्म विशेष रूप से उच्च उत्पादकता के लिए जाना जाता है. इस किस्म के फल गहरे हरे रंग के होते हैं, जिससे बाजार में इनकी मांग अधिक रहती है. यह किस्म गर्मी और बरसात दोनों मौसमों के लिए उपयुक्त मानी जाती है. इसकी फसल लगभग 44-48 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को जल्दी मुनाफा मिलने की संभावना बढ़ जाती है. इसके अलावा, यह किस्म प्रमुख रोगों के प्रति सहनशील है, जिससे किसान 24.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

पूसा हाइब्रिड-4 (डी.बी.जी.एच.-12)

करेले की यह किस्म पूसा हाइब्रिड-4 (डी.बी.जी.एच.-12) किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है, क्योंकि यह किस्म गायनोंसियस आधारित करेले की प्रथम संकर किस्म है, जिसकी बाजारों में अधिक मात्रा में मांग रहती है. ऐसे में अगर किसान इस किस्म का चुनाव करते हैं, तो लगभग 55-60 दिन और सही देखभाल में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

कितना मुनाफा होगा?

अगर किसान भाई करेले की इन उत्तम किस्मों की खेती करते हैं तो बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं, क्योंकि बाजारों में भी करेले की अधिक तौर पर मांग रहती है. ऐसे में अगर किसान यदि 50 क्विंटल तक उपज प्राप्त करते हैं और मंडी में औसत भाव 40-50 रुपये प्रति किलों मिलता है, तो किसानों को लगभग  2 से 2.5 लाख रुपये से अधिक मुनाफा हो सकता है.








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