संसद के विशेष सत्र में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण बिल) पर चल रही ऐतिहासिक बहस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 16 अप्रैल को लोकसभा को संबोधित किया।प्रधानमंत्री का यह भाषण न केवल महिला सशक्तिकरण के प्रति उनकी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि उन्होंने विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे 'राजनीतिक श्रेय' (Credit) के विवाद पर भी विराम लगाने की कोशिश की। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बिल किसी एक दल की जीत नहीं, बल्कि पूरे देश की सामूहिक सफलता है।
1. क्रेडिट के लिए ब्लैंक चेक देने को तैयार
विपक्ष द्वारा बिल का श्रेय लेने की कोशिशों पर पीएम मोदी ने कहा, "अगर बात सिर्फ क्रेडिट की है, तो आप ले लीजिए। यहाँ बैठा कोई भी व्यक्ति अपनी फोटो छपवा सकता है, मैं क्रेडिट लेने के लिए आपको ब्लैंक चेक देने को तैयार हूँ।" उन्होंने साफ किया कि उनकी सरकार विज्ञापनों में विपक्ष की फोटो लगाने में भी संकोच नहीं करेगी।
2. राजनीतिक लाभ से बड़ा है राष्ट्रहित
पीएम मोदी ने स्वीकार किया कि इस बिल से उन्हें राजनीतिक लाभ मिल सकता है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा, "यह स्पष्ट है कि मुझे इससे राजनीतिक लाभ होगा। लेकिन अगर तीन दशकों की देरी के बाद भी इसे अब नहीं किया गया, तो इसका लाभ सभी दलों और देश की जनता के हाथ से निकल जाएगा।"
3. देश को टुकड़ों में नहीं बांट सकते
दक्षिण बनाम उत्तर की बहस और परिसीमन के विरोध पर पीएम ने कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, "हमें एक राष्ट्र के रूप में सोचना होगा। संविधान ने हमें देश को 'टुकड़े-टुकड़े' (Tukde) में बांटने का अधिकार नहीं दिया है। हम इस मानसिकता के साथ निर्णय नहीं ले सकते।"
4. किसी राज्य के साथ नहीं होगा अन्याय
परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर उन्होंने आश्वस्त किया कि इन विधेयकों के जरिए किसी भी राज्य के साथ कोई अन्याय नहीं होगा और न ही किसी के साथ भेदभाव किया जाएगा। उन्होंने इसे 'विकसित भारत' के लिए नारी शक्ति का स्वागत करने का अवसर बताया।
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5. OBC हूं, लेकिन सबको साथ लेकर चलूंगा
अपनी पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही वह ओबीसी समुदाय से आते हैं, लेकिन उनकी जिम्मेदारी 'सबका साथ, सबका विकास' सुनिश्चित करना है और वह समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे। विपक्ष के 'गारंटी' और 'वादे' जैसे शब्दों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, अगर आप चाहते हैं कि मैं गारंटी या वादा शब्द का इस्तेमाल करूं, तो मैं करूंगा। अगर तमिल में कोई उपयुक्त शब्द है, तो उसे भी इस्तेमाल करूंगा। लेकिन जब नीयत साफ हो, तो शब्दों के खेल की जरूरत नहीं पड़ती।
6. महिलाओं की बुद्धिमत्ता पर भरोसा रखें
कोटे के भीतर कोटे (Sub-quota) की मांग पर पीएम ने कहा, "देश की बहनों और उनकी बुद्धिमत्ता पर भरोसा रखें। पहले 33% महिलाओं को यहाँ (संसद) आने दें, फिर वे खुद तय करेंगी कि उनके भीतर किन वर्गों को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।"
7. यह किसी एक दल की जीत नहीं
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण बिल का पारित होना पूरे देश की सामूहिक सफलता होगी। उन्होंने कहा, "यह किसी एक पार्टी या मोदी की जीत नहीं होगी, बल्कि पूरे राष्ट्र की जीत के रूप में दर्ज की जाएगी।"
8. संसद को नई दिशा देने का समय
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और यह कानून हमारी विधायी प्रक्रिया को और अधिक संवेदनशील बनाएगा। उन्होंने इसे लोकतंत्र की विकास यात्रा में एक 'नया आयाम' जोड़ने वाला बताया।
9. 30 साल की देरी अब और नहीं होनी चाहिए
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा पिछले 25-30 वर्षों से लंबित है और अब इसे और टालना देश के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर अब भी फैसला नहीं लिया गया, तो इसका नुकसान सभी दलों और देश की जनता को होगा।
PM Modi ने बिल को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील
पीएम मोदी ने सभी दलों से इस बिल को सर्वसम्मति से पारित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, जब सर्वसम्मति होती है, तो सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। यह बिल पूरे राष्ट्र की सामूहिक सफलता होगी, किसी एक पार्टी की जीत नहीं। हमें इसे राजनीतिक रंग देने की कोई आवश्यकता नहीं है।
प्रधानमंत्री के इस संबोधन के बाद सदन में सकारात्मक माहौल देखा गया, हालांकि विपक्षी दल अब भी परिसीमन और लागू होने की समयसीमा को लेकर अपने सवाल उठा रहे हैं।


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