रायपुर, 16 अप्रैल 2026 : वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार और बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम के नेतृत्व में वन विभाग अंतर्गत छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा राज्य में हर्बल खेती को बढ़ावा देने के लिए कई नवाचार योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण किसानों, विशेषकर महिलाओं की आय बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इन्हीं प्रयासों के तहत एक अभिनव पहल के रूप में पंचायतों के चारागाहों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
औषधि पादप बोर्ड द्वारा के अंतर्गत बाजार की मांग और बेहतर कीमत को ध्यान में रखते हुए बच, ब्राह्मी, पचौली, पामारोजा, खस और लेमनग्रास जैसे पौधों का चयन किया गया है। इस योजना की सफलता की एक प्रेरक कहानी धमतरी जिले के पचपेड़ी गांव से सामने आई है। यहां के चारागाह क्षेत्र को महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से औषधीय खेती के मॉडल केन्द्र के रूप में विकसित किया गया है। लगभग 5.5 एकड़ भूमि में विभिन्न पौधों का रोपण किया गया है, जिसमें बच, लेमनग्रास, पामारोजा, खस, ब्राह्मी और पचौली शामिल हैं।
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बोर्ड द्वारा महिलाओं को इस खेती का प्रशिक्षण दिया गया और उन्हें निःशुल्क पौधे भी उपलब्ध कराए गए। इसके बाद महिलाओं ने समूह के रूप में मिलकर खेती शुरू की। आज यह चारागाह न केवल उत्पादन का केन्द्र बन चुका है, बल्कि किसानों के प्रशिक्षण और सीखने का भी प्रमुख स्थान बन गया है।
पचपेड़ी का यह मॉडल अब आसपास के गांवों के लिए प्रेरणा बन रहा है। किसान यहां आकर औषधीय पौधों की खेती की तकनीक सीख रहे हैं और इसे अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। जल्द ही धमतरी जिले के कोटगांव में भी इस तरह की खेती शुरू की जाएगी। इस नवाचार योजना के माध्यम से चारागाहों का बेहतर उपयोग हो रहा है और महिलाओं के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।


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