रायपुर नगर निगम में 100 करोड़ का कथित घोटाला: जांच के लिए 4 सदस्यीय कमेटी गठित

रायपुर नगर निगम में 100 करोड़ का कथित घोटाला: जांच के लिए 4 सदस्यीय कमेटी गठित

 रायपुर : रायपुर नगर निगम में TNC (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) और मार्ग संरचना अप्रूवल के नाम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। इस बीच अब निगम आयुक्त विश्वदीप ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इस संबंध में आदेश नगर पालिका निगम रायपुर कार्यालय से जारी किया गया है।

नगर पालिका निगम आयुक्त विश्वदीप ने कहा कि चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। इसमें पंकज शर्मा (अपर आयुक्त, नगर निवेश) को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। आभाष मिश्रा (नगर निवेश) सदस्य हैं। आशुतोष सिंह (कार्यपालन अभियंता, नगर निवेश) सचिव हैं। साथ ही सोहन गुप्ता (उप अभियंता, नगर निवेश) सदस्य हैं। कमेटी से मामले की विस्तृत जांच कर प्रतिवेदन मांगा गया है।

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अवैध कॉलोनियों को अवैध तरीके से वैध करने का षड्यंत्र

नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इस घोटाले को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह 100 करोड़ से अधिक का घोटाला है। दलाल, बिल्डरों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से खेल खेला गया है। नियम-कानून और प्रक्रिया को तिलांजलि दे दी गई है। मामले की जानकारी होते ही मूल नस्ती गायब कर दी गई। अवैध कॉलोनियों को अवैध तरीके से वैध करने का एक बड़ा षड्यंत्र है।

घोटाले का केंद्र- बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर, बिलाल नगर

यह पूरा मामला कामरेड सुधीर मुखर्जी वार्ड क्रमांक 54 अंतर्गत आरडीए कॉलोनी से लगे बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर क्षेत्र के भूखंडों से जुड़ा है। इनमें भूखंड क्रमांक 81, 82, 86 से लेकर 450 तक कुल 70 से अधिक खसरा नंबर, All of Part शामिल हैं।

प्रक्रिया कैसे बायपास की गई?

नियम के अनुसार अप्रूवल की प्रक्रिया इस प्रकार है—

जोन से फाइल निगम मुख्यालय आती है।
निगम कमिश्नर अप्रूवल देते हैं।
फिर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) विभाग भेजी जाती है।
TNC से वापस कमिश्नर के पास आती है और अंतिम अप्रूवल के बाद जोन को भेजी जाती है।

लेकिन इस मामले में जोन क्रमांक 10 से फाइल सीधे TNC विभाग पहुंचा दी गई। निगम कमिश्नर को पूरी तरह बायपास कर दिया गया। जब TNC से फाइल कमिश्नर के पास आई, तो उन्होंने हैरानी जताई कि यह फाइल तो उन्होंने अप्रूव ही नहीं की थी। इसके बाद जोन क्रमांक 10 से मूल नस्ती मंगवाई गई, तो पता चला कि मूल फाइल गायब हो चुकी है। जोन आयुक्त, जोन-10 ने नस्ती गुम होने का आधिकारिक पत्र भी लिखा है।फिलहाल, अब जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।








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