इस स्प्रे से लद जाएगी नींबू की डालियां, मिलेगा भरपूर उत्पादन

इस स्प्रे से लद जाएगी नींबू की डालियां, मिलेगा भरपूर उत्पादन

वैसे गर्मी के सीजन में नींबू की मांग अधिक बढ़ जाती है. मार्केट में 1-1 नींबू की कीमत 10 रुपये से कम नहीं होती है. हालांकि इसकी खेती में सबसे बड़ी समस्या तब आती है. जब फल छोटे रह जाते हैं या उनमें रस कम होता है. ऐसे में किसानों को काफी घाटा होता है. आइये आज हम आपको नींबू की खेती के बारे में बताते हैं. अगर नींबू के पौधों में छोटे फल आ रहे हैं तो फल बनते समय जिंक, कॉपर और पोटैशियम जैसे तत्वों की विशेष जरूरत होती है. केवल पानी देना काफी नहीं है. सही समय पर सिंचाई के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों का पत्तियों पर छिड़काव करें. जिंक सल्फेट और कॉपर का मिश्रण फलों का आकार बढ़ाता है, जबकि पोटैशियम रस की मात्रा और छिलके की चमक सुधारता है.

नींबू के पौधों में फल बनते समय नमी की सख्त जरूरत होती है, लेकिन पानी का जमाव जड़ें सड़ा सकता है. रसदार फल पाने के लिए मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखें. जब ऊपरी मिट्टी एक इंच तक सूख जाए, तभी पानी दें. वहीं, फूल आने के दौरान पानी कम दें, लेकिन फल सेट हो जाने पर नियमित सिंचाई करें. ताकि फल अंदर से सूखे न रहें.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फलों का आकार बढ़ाने के लिए केवल खाद काफी नहीं होती. जिंक और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से फल छोटे रह जाते हैं. समाधान के रूप में जिंक सल्फेट और मैग्नीशियम सल्फेट का मिश्रण तैयार कर पत्तियों पर छिड़काव करें. यह प्रक्रिया पौधों में प्रकाश संश्लेषण को तेज करती है, जिससे फलों को अधिक ऊर्जा मिलती है और उनका आकार तेजी से बढ़ता है.

रस की मात्रा और छिलके की चमक के लिए पोटैशियम और बोरॉन जादू की तरह काम करते हैं. पोटैशियम फलों में शुगर और रस बढ़ाता है, जबकि बोरॉन फलों को फटने से बचाता है. प्रति पौधा 50-100 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश या राख का उपयोग करें. साथ ही, 1 ग्राम बोरेक्स प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. इससे फल रसीले, मीठे और आकर्षक बनते हैं. 

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अगर आप महंगे रसायनों से बचना चाहते हैं, तो अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का इस्तेमाल करें. फल आने के दौरान पौधे की जड़ों के चारों ओर गुड़ाई करके कंपोस्ट डाल दें. इसमें मौजूद नाइट्रोजन और फास्फोरस जड़ों को मजबूत बनाते हैं. साथ ही 'सीवीड लिक्विड' का इस्तेमाल फलों के वजन को बढ़ाने में बहुत प्रभावी साबित होता है.

पौधे की ऊर्जा का सही दिशा में जाना जरूरी है. अक्सर निचले हिस्से में फालतू टहनियां निकल आती हैं, जो सारा पोषण सोख लेती हैं. फल आने के दौरान सूखी, बीमार या घनी टहनियों को काट दें. इससे फलों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है. वहीं, बेहतर वेंटिलेशन फलों का आकार बढ़ाता है और कीटों के हमले को भी कम करता है.

नींबू में 'सिट्रस कैंकर' या 'लीफ माइनर' जैसे रोग फलों की ग्रोथ रोक देते हैं. अगर फलों पर काले धब्बे दिखें या पत्तियां मुड़ने लगें, तो नीम के तेल या फंगीसाइड का छिड़काव करें. स्वस्थ पौधा ही बड़े फल पैदा कर सकता है. समय-समय पर पौधों का निरीक्षण करें और कीटों को फल के छिलके को नुकसान न पहुंचाने दें, वरना रस कम हो जाएगा








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