बिजली संकट से जूझता छुरा: किसान अंधेरे में, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

बिजली संकट से जूझता छुरा: किसान अंधेरे में, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

लो-वोल्टेज और कटौती से फसलें संकट में, उद्योगों को निर्बाध आपूर्ति पर सवाल—किसान संगठनों की चुप्पी भी चर्चा में

 

परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद/छुरा : ऊर्जा उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखने वाले छत्तीसगढ़ में ही अब बिजली संकट गहराता नजर आ रहा है। जिले के छुरा क्षेत्र में इन दिनों लो-वोल्टेज और लगातार बिजली कटौती से हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। किसान, व्यापारी और आम नागरिक सभी इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन ही मिल रहा है।
भीषण गर्मी के इस दौर में जहां किसानों को अपनी फसलों के लिए नियमित सिंचाई की आवश्यकता है, वहीं बिजली की अनियमित आपूर्ति और कम वोल्टेज ने उनकी मेहनत पर संकट खड़ा कर दिया है। मोटर पंप पर्याप्त वोल्टेज के अभाव में नहीं चल पा रहे, जिससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा और खड़ी फसल सूखने की कगार पर पहुंच रही है।

ऊर्जा राज्य में ही बिजली का संकट, उठे सवाल
छत्तीसगढ़ को बिजली उत्पादन में अग्रणी राज्यों में गिना जाता है, ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर प्रदेश के ही ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कमी क्यों है? क्या राज्य की बिजली अन्य राज्यों को बेची जा रही है या स्थानीय जरूरतों की अनदेखी की जा रही है?

ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है

उद्योगों को प्राथमिकता, गांवों में अंधेरा?
क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि बड़े उद्योगों और फैक्ट्रियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल रही है, जबकि गांवों में लो-वोल्टेज और कटौती आम बात हो गई है। इस कथित असमानता ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फसल पर मंडराता खतरा, किसान चिंतित
लो-वोल्टेज के कारण सिंचाई बाधित होने से किसान खासे परेशान हैं। कई किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उनकी पूरी फसल बर्बाद हो सकती है, जिससे आर्थिक संकट गहरा जाएगा।

व्यापार और जनजीवन पर भी असर
बिजली की अनियमितता का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। छोटे व्यापारियों का काम प्रभावित हो रहा है, वहीं आम नागरिकों को भीषण गर्मी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है।

24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे कटघरे में
सरकार द्वारा किसानों को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के दावे अब सवालों के घेरे में हैं। जमीनी स्तर पर हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

किसान संगठनों की चुप्पी पर सवाल
इस गंभीर मुद्दे पर राजनीतिक दलों के किसान मोर्चा और संगठनों की निष्क्रियता भी चर्चा का विषय बनी हुई है। आमतौर पर किसानों के हित में आवाज उठाने वाले ये संगठन इस बार खामोश नजर आ रहे हैं।

जवाबदेही तय करने की मांग
स्थानीय नागरिकों और किसानों ने बिजली विभाग और प्रशासन से तत्काल सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक ऐसी समस्याएं बनी रहेंगी।

छुरा क्षेत्र में गहराते बिजली संकट ने न केवल किसानों की फसल बल्कि आम जनजीवन को भी प्रभावित किया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन, सरकार और जनप्रतिनिधि इस समस्या के समाधान के लिए कितनी गंभीरता दिखाते हैं।








You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments