देवी अलक्ष्मी कौन हैं? जानें उनसे जुड़े पौराणिक तथ्य और मान्यताएं

देवी अलक्ष्मी कौन हैं? जानें उनसे जुड़े पौराणिक तथ्य और मान्यताएं

हिंदू धर्म में देवी लक्ष्मी को धन, वैभव और सौभाग्य की देवी माना जाता है, जिनकी पूजा हर घर में सुख-समृद्धि के लिए की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देवी लक्ष्मी की एक बड़ी बहन भी हैं, जिन्हें 'अलक्ष्मी' कहा जाता है? अलक्ष्मी को दरिद्रता, कंगाली और दुर्भाग्य की देवी माना जाता है। जहां लक्ष्मी के आने से घर में खुशहाली आती है, वहीं देवी अलक्ष्मी के आने से जीवन कष्टों से भर जाता है। आइए जानते हैं कौन हैं देवी अलक्ष्मी और क्यों उनके नाम मात्र से लोग डर जाते हैं?

समुद्र मंथन और अलक्ष्मी का जन्म
जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था, तब उसमें से 14 रत्न निकले थे। इन रत्नों के निकलने से पहले समुद्र से विष निकला था, जिसे भगवान शिव ने ग्रहण किया। इसी मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी से पहले एक अन्य देवी प्रकट हुई थीं, जिन्हें ज्येष्ठ लक्ष्मी यानी अलक्ष्मी कहा गया। वे मां लक्ष्मी से पहले जन्मी थीं, इसलिए उन्हें बड़ी बहन माना जाता है। लक्ष्मी जी का जन्म जहां अमृत के साथ हुआ, वहीं अलक्ष्मी का संबंध अशुभता से जोड़ा गया।

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कहां होता है अलक्ष्मी का वास?

देवी अलक्ष्मी को गंदगी, अंधकार और क्लेश प्रिय है। शास्त्रों के अनुसार, जिस घर में साफ-सफाई नहीं रहती, जहां लोग हमेशा लड़ते-झगड़ते हैं और बड़ों का अपमान करते हैं, वहां अलक्ष्मी वास करती हैं। इसके अलावा, जो लोग शाम के समय सोते हैं, जुआ खेलते हैं या अधर्म के मार्ग पर चलते हैं, उनके पास दरिद्रता खुद चलकर आती है।

अलक्ष्मी को दूर रखने के उपाय

  1. घर के मुख्य द्वार और ईशान कोण को हमेशा साफ रखें।
  2. गोधूलि बेला यानी शाम के समय घर में अंधेरा न रखें, एक दीपक जरूर जलाएं।
  3. घर में अपशब्दों और कलह से बचें, क्योंकि जहां शांति होती है, वहां अलक्ष्मी नहीं ठहरतीं।
  4. शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से भी दरिद्रता दूर होती है।








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