स्कंद षष्ठी का त्योहार मुख्य रूप से दक्षिण भारत में मनाया जाता है। भगवान स्कन्द को मुरुगन, कार्तिकेय और सुब्रहमन्य के नाम से भी जाना जाता है। बता दें ये व्रत हर महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो भी श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से भगवान कार्तिकेय का व्रत रखकर उनकी आराधना करता है उसके जीवन के तमाम कष्ट दूर हो जाते हैं। इसके अलावा संतान के जीवन में आ रही समस्याओं का भी अंत हो जाता है। चलिए जानते हैं अप्रैल में स्कंद षष्ठी कब है और क्या है इसकी पूजा विधि।
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स्कंद षष्ठी 2026
स्कन्द षष्ठी की पूजा विधि
स्कन्द षष्ठी व्रत का महत्व
स्कन्द षष्ठी के अवसर पर कार्तिकेय भगवान की प्रतिमा की स्थापना करके उनकी पूजा की जाती है और अखंड दीपक जलाएं जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को विधि विधान रखने से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है और यदि पहले से संतान है तो उसके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस व्रत को करने से मंगल ग्रह भी मजबूत होता है।


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