कम लागत, कम जोखिम और तगड़ा मुनाफा—गर्मी में बाजार में छाया ये कारोबार

कम लागत, कम जोखिम और तगड़ा मुनाफा—गर्मी में बाजार में छाया ये कारोबार

गर्मी के मौसम में जहां शरीर को ठंडक और हाइड्रेशन की जरूरत बढ़ जाती है, वहीं बाजार में भी लंबी ककड़ी की डिमांड तेजी से बढ़ जाती है. पानी से भरपूर यह फसल न सिर्फ सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली भी साबित हो रही है. यही वजह है कि अब किसान पारंपरिक फसलों के साथ ककड़ी की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं.

ककड़ी की खेती करने की टिप्स
मंगलू कश्यप के अनुसार, ककड़ी की खेती के लिए सबसे पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी करना जरूरी होता है. इसके लिए दो बार हल चलाने के बाद एक बार रोटावेटर चलाया जाता है. फिर दोबारा हल और रोटावेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बनाया जाता है. इसके बाद खेत में बेड तैयार किए जाते हैं, जिनकी दूरी करीब 4 फीट रखी जाती है, जबकि पौधे से पौधे की दूरी लगभग 1 फीट होनी चाहिए.

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गोबर खाद और 19:19 का उपयोग
उन्होंने बताया कि ककड़ी की खेती बीज या पौध, दोनों तरीके से की जा सकती है. उन्होंने खुद जनवरी महीने में इसकी बुवाई की, लेकिन यह फसल लगभग सालभर लगाई जा सकती है. खाद और पोषण के लिए उन्होंने सुपर फॉस्फेट, डीएपी, गोबर खाद और 19:19 (एनपीके) का उपयोग किया है.  मैंने दस से पंद्रह डिसमिल में खीरा लगाया है.

यह फसल ढाई महीने में फल देना शुरू कर देती है. लगभग चार महीने की फसल होती है. इसमें मेरे यहां अब तक बीमारी नहीं आई है. पौधा मरने की शिकायत आई थी, इसके लिए रिडोमिल का छिड़काव किया. इसके बाद कीटनाशक दवाई का छिड़काव कर रहे हैं. पहले थोक भाव 30-35 रुपये था, अब 25 रुपये किलो चल रहा है. एक बार तुड़ाई में 70-80 किलो निकलता है, अभी कम हुआ है इसमें तीन-चार हजार का खर्च आया है और तीस से चालीस हजार तक मुनाफा होगा.








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