बेमेतरा टेकेश्वर दुबे : कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), बेमेतरा में अक्ति तिहार के पावन अवसर पर “उर्वरक के वैकल्पिक स्रोत” विषय पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान केवीके प्रक्षेत्र में छत्तीसगढ़ महतारी एवं धरती माता की पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ बीज बुआई के नेग कार्य संपन्न कर कृषि पर्व को उत्साहपूर्वक मनाया गया।प्रशिक्षण के दौरान कृषकों को नील-हरित काई (ब्लू-ग्रीन एल्गी) की उत्पादन तकनीक की प्रायोगिक जानकारी दी गई, जिससे वे कम लागत में जैव उर्वरक तैयार कर सकें। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारी एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख ने अक्ति तिहार के पारंपरिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए जैव उर्वरकों की उपयोगिता पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश के 100 सर्वाधिक डीएपी उर्वरक उपयोग करने वाले जिलों में छत्तीसगढ़ से बेमेतरा जिला भी शामिल है।
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इसी को ध्यान में रखते हुए खरीफ 2026 की तैयारी हेतु जिले में उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए व्यापक कृषक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।डॉ. टी.डी. साहू ने रासायनिक एवं जैविक उर्वरकों के विभिन्न विकल्पों और उनके समन्वित उपयोग की जानकारी देते हुए किसानों को फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। वहीं, डॉ. उमेश ध्रुव ने उर्वरकों के आयात में कमी की स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए कृषकों को प्रेरित किया। मुख्य अतिथि डॉ. संदीप भंडारकर ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग एवं समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी दी। तकनीकी सत्र के अंत में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी द्वारा मिट्टी परीक्षण, जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र, बेमेतरा एवं कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी सहित विभिन्न ग्रामों से आए 50 से अधिक कृषक एवं कृषि छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


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