बेमेतरा टेकेश्वर दुबे :जिले में पटवारियों के हालिया स्थानांतरण आदेश के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है। जहां एक ओर शासन द्वारा पारदर्शिता और सुशासन के उद्देश्य से तबादला सूची जारी की गई, वहीं दूसरी ओर कुछ पटवारी खुले तौर पर इस आदेश को प्रभावित करने के प्रयासों में जुट गए हैं। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, कई पटवारी अपने राजनीतिक संपर्कों का सहारा लेकर तबादला निरस्त कराने के लिए लगातार दबाव बनवा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि जिन पटवारियों का वर्षों से एक ही हल्के में जमे रहना रहा है, उनके खिलाफ पहले से ही कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें मिलती रही हैं। ऐसे में जब प्रशासन ने उन्हें अन्य स्थानों पर भेजने का निर्णय लिया, तो इन पटवारियों के बीच बेचैनी बढ़ गई। यही कारण है कि अब वे सत्ता और विपक्ष के कुछ जनप्रतिनिधियों के जरिए आदेश रुकवाने की कवायद में लग गए हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा जोरों पर है कि कुछ पटवारियों के तार भू-माफियाओं से जुड़े हुए हैं। आरोप है कि जमीन नामांतरण, सीमांकन और रिकॉर्ड सुधार जैसे संवेदनशील कार्यों में नियमों की अनदेखी कर निजी लाभ कमाने का खेल लंबे समय से चलता आ रहा है। कई मामलों में फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन की हेराफेरी किए जाने की बातें भी सामने आई हैं। ऐसे में स्थानांतरण के बाद इन मामलों के उजागर होने का खतरा बढ़ने से संबंधित लोग असहज हैं।
ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ पटवारियों द्वारा अपने प्रभाव का उपयोग कर नए पदस्थापना स्थल पर जॉइनिंग में देरी की जा रही है। वहीं, कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि आदेश जारी होने के बाद भी संबंधित पटवारी पुराने स्थान पर ही कामकाज कर रहे हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। यह स्थिति शासन के निर्देशों की खुली अवहेलना मानी जा रही है।
इस पूरे मामले ने प्रशासन की साख पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। आम नागरिकों का कहना है कि यदि निचले स्तर पर ही इस प्रकार की मनमानी और दबाव की राजनीति हावी रहेगी, तो पारदर्शी शासन की कल्पना अधूरी रह जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि संबंधी कार्यों के लिए पटवारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, ऐसे में उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठना गंभीर चिंता का विषय है।
वहीं, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों के एक वर्ग ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जिन पटवारियों पर भू-माफियाओं से सांठगांठ के आरोप हैं, उनके पिछले कार्यकाल की भी जांच की जानी चाहिए। यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो सख्त कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किए जाने चाहिए।
प्रशासनिक सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण आदेश पूरी तरह नियमों के तहत जारी किए गए हैं और किसी भी प्रकार का अनावश्यक हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि कोई कर्मचारी आदेश की अवहेलना करता पाया गया, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं।
इधर, यह मामला अब आमजन के बीच भी चर्चा का विषय बन चुका है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस पर सख्ती दिखाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर एक स्पष्ट संदेश देगा कि शासन के आदेशों से ऊपर कोई नहीं है।
फिलहाल, बेमेतरा में पटवारियों के तबादले को लेकर उठे इस विवाद ने एक बड़े मुद्दे का रूप ले लिया है। आने वाले दिनों में इस मामले में क्या कार्रवाई होती है और क्या कोई बड़ा खुलासा सामने आता है, इस पर जिलेभर की नजरें टिकी हुई हैं।


Comments