विरासत के पन्नों को मिल रही नई पहचान: गरियाबंद में पांडुलिपि संरक्षण अभियान ने पकड़ी रफ्तार

विरासत के पन्नों को मिल रही नई पहचान: गरियाबंद में पांडुलिपि संरक्षण अभियान ने पकड़ी रफ्तार

ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे के तहत गांव-गांव खोजी जा रही ऐतिहासिक धरोहरें, कलेक्टर ने खुद पहुंचकर किया दुर्लभ तालपत्रों का अवलोकन

 

परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद : जिले की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की दिशा में ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान अब तेज़ी पकड़ चुका है। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत जिले की 324 ग्राम पंचायतों और 6 नगरीय निकायों में व्यापक स्तर पर प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा रहा है।इसी क्रम में कलेक्टर बीएस उइके ने आज विकासखंड गरियाबंद के ग्राम पंचायत दांतबायकला अंतर्गत ग्राम बोकरामुड़ा पहुंचकर बिसुराम सोरी के घर संरक्षित एक अत्यंत दुर्लभ तालपत्र पांडुलिपि का अवलोकन किया। यह पांडुलिपि उड़िया भाषा में लिखी गई है, जिसे उनके परदादा ने लगभग एक सदी पूर्व संजोकर रखा था।बिसुराम सोरी ने बताया कि इन तालपत्रों में ज्योतिष शास्त्र से जुड़ी गूढ़ गणनाएं, शुभ मुहूर्त निर्धारण और उस समय की पारंपरिक मान्यताओं का विस्तार से उल्लेख है। विवाह, गृह प्रवेश और भूमि पूजन जैसे मांगलिक कार्यों का समय निर्धारण इन्हीं पांडुलिपियों के आधार पर किया जाता था। करीब 229 पृष्ठों में विस्तृत यह पांडुलिपि आज भी उनके परिवार के लिए अमूल्य धरोहर है, जिसकी विशेष अवसरों पर पूजा-अर्चना भी की जाती है।

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कलेक्टर उइके की उपस्थिति में इस ऐतिहासिक पांडुलिपि का जियो-टैगिंग कार्य पूर्ण किया गया। उन्होंने इसे जिले की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए इसके संरक्षण, डिजिटलीकरण और शोध के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्राचीन पांडुलिपियां हमारे इतिहास, विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान का जीवंत स्रोत हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।कलेक्टर ने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि उनके पास 70 वर्ष या उससे अधिक पुरानी कोई भी हस्तलिखित पांडुलिपि है, तो वे उसकी जानकारी प्रशासन को अवश्य दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सर्वेक्षण पूरी तरह स्वैच्छिक है और इससे पांडुलिपियों के स्वामित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर सुश्री नेहा भेड़िया, जनपद पंचायत सीईओ के.एस. नागेश सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। विरासत को सहेजने का यह अभियान न सिर्फ इतिहास को संरक्षित कर रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का खजाना भी सुरक्षित कर रहा है।








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