क्या प्रेम कहानी ने बदल दी नर्मदा की धारा? जानिए सदियों पुराना रहस्य

क्या प्रेम कहानी ने बदल दी नर्मदा की धारा? जानिए सदियों पुराना रहस्य

भारत की भूमि नदियों की भूमि है। गंगा, यमुना, गोदावरी जैसी बड़ी नदियां बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, जिसका मतलब है कि वे पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं। लेकिन देश की एक ऐसी प्रमुख नदी है, जो इस प्राकृतिक नियम के विपरीत चलती है नर्मदा। नर्मदा नदी पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है। इस उलटे प्रवाह के पीछे जितनी दिलचस्प पौराणिक कथा है, उतना ही ठोस वैज्ञानिक तर्क भी मौजूद है। आइए इसके पीछे की कथा पढ़ते हैं।

एक अधूरी प्रेम कहानी और अटूट प्रण
स्कंद पुराण के अनुसार, नर्मदा नदी के इस तरह बहने के पीछे एक प्रेम कहानी छिपी है। ऐसा कहा जाता है कि नर्मदा, राजा मैखल की पुत्री थी। उनका विवाह राजकुमार सोनभद्र के साथ तय हुआ था। नर्मदा सोनभद्र से बहुत प्रेम करती थी। विवाह से पहले नर्मदा ने अपनी दासी जोहिला के हाथों सोनभद्र के लिए एक प्रेम संदेश भेजा। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। राजकुमार सोनभद्र, जोहिला के रूप-सौंदर्य पर मोहित हो गए। जब इसकी जानकारी नर्मदा को हुई तो वे बहुत दुखी हुईं। उन्होंने उसी पल गुस्से और दुख में अपना रास्ता बदल लिया और आजीवन कुंवारी रहने का प्रण लिया।

ऐसा माना जाता है कि इसी शोक और संकल्प के कारण नर्मदा ने सोनभद्र से विपरीत दिशा में बहना शुरू कर दिया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज भी अमरकंटक में नर्मदा और सोनभद्र की धाराएं अलग-अलग दिशाओं में बहती दिखाई देती हैं।

ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है

वैज्ञानिक वजह
पौराणिक कथाओं से हटकर इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क भी है। नर्मदा नदी जिस रास्ते से होकर गुजरती है, वह रिफ्ट वैली कहलाती है। नर्मदा नदी विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वतमाला के बीच स्थित एक धंसी हुई घाटी से होकर बहती है। भारतीय प्रायद्वीप का सामान्य ढलान पूर्व की ओर है, लेकिन इन दो विशाल पर्वत के बीच की जमीन की बनावट ऐसी है कि इसका ढलान पश्चिम की ओर हो गया है। यही वजह है कि नर्मदा और ताप्ती जैसी नदियों को पश्चिम की ओर बहने पर मजबूर कर देता है।

धार्मिक महत्व
नर्मदा नदी को रेवा के नाम से भी जाना जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार, नर्मदा के दर्शन मात्र से उतने ही पुण्य फल मिलते हैं, जितने गंगा में स्नान करने से प्राप्त होते हैं। वहीं, इसका विपरीत प्रवाह भक्तों के लिए दृढ़ संकल्प और अपनी राह खुद चुनने का प्रतीक माना जाता है।








You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments