परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद/छुरा : आदिवासी विकासखंड छुरा के ग्राम मड़ेली में बीते वर्ष 9 मई 2025 को आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा किए गए बड़े-बड़े वादे आज तक धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं। सुशासन तिहार के नाम पर जहां सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने छुरा अंचल में बिजली कटौती और लो वोल्टेज की समस्या से निजात दिलाने के लिए 132 केवी सब स्टेशन हेतु 75 करोड़ रुपये की स्वीकृति देने की घोषणा की थी। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी यह घोषणा राज्य के बजट में कहीं दिखाई नहीं दी, जिससे क्षेत्रवासियों में निराशा बढ़ी है।वहीं दूसरी ओर, महतारी वंदन योजना में छूटे हुए हजारों पात्र हितग्राहियों को जोड़ने के लिए अब तक पोर्टल नहीं खोला गया है। लगातार मांग के बावजूद योजना का लाभ कई महिलाओं तक नहीं पहुंच पा रहा है।
सबसे गंभीर स्थिति निराश्रित और वृद्धा पेंशन को लेकर सामने आई है। पिछले पांच महीनों से पेंशन की राशि नहीं मिलने से बेसहारा बुजुर्गों और जरूरतमंदों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं, सरकार द्वारा चावल उत्सव के नाम पर केवल तीन महीने का राशन वितरण कर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने का आरोप भी लगाया जा रहा है।कांग्रेस नेता एवं पार्षद हरिश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “भाजपा सरकार आदिवासी क्षेत्रों में झूठे वादे कर जनता को गुमराह कर रही है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ केवल भाषणों तक सीमित रह गया है। आज हालत यह है कि सामान्य परिवार पांच डिसमिल से कम जमीन भी नहीं खरीद सकते, जो पूरी तरह तुगलकी निर्णय है।”उन्होंने आगे कहा कि पंचायतों में विकास कार्य ठप पड़े हैं और केवल टीना शेड जैसे सीमित कार्य ही कराए जा रहे हैं, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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इसी तरह नगर पंचायत छुरा के वरिष्ठ पार्षद एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष सलीम मेमन ने महतारी वंदन योजना के केवाईसी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि “महिलाओं को बार-बार केवाईसी के नाम पर परेशान किया जा रहा है। भीषण गर्मी में उन्हें चॉइस सेंटरों के बाहर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है और इसके लिए पैसे भी खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में सभी विवाहित महिलाओं को योजना का लाभ देने का वादा किया था।”
वहीं, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के वादों पर भी सवाल उठने लगे हैं। राजिम विधायक रोहित साहू द्वारा छुरा-गरियाबंद मार्ग चौड़ीकरण का आश्वासन और महासमुंद सांसद द्वारा कोमाखान-छुरा-गरियाबंद मार्ग के निर्माण एवं मरम्मत के दावे भी अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। एक साल बाद भी सड़क की स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे आमजन में नाराजगी बढ़ती जा रही है।कुल मिलाकर, सुशासन तिहार के आयोजन के बीच जमीनी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। पेंशन, राशन, बिजली, सड़क और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर उठ रहे सवालों ने सरकार के दावों की पोल खोल दी है। अब देखना होगा कि सरकार इन मुद्दों पर क्या ठोस कदम उठाती है या फिर ये वादे भी केवल घोषणाओं तक ही सीमित रह जाएंगे।


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