परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद /छुरा : गरियाबंद जिले में कलेक्टर बी.एस. उइके द्वारा राजस्व मामलों के त्वरित निराकरण के सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद छुरा तहसील और छुरा अनुविभागीय कार्यालय में इन आदेशों का जमीनी असर नजर नहीं आ रहा है। आम नागरिक आज भी फौती, नामांतरण और त्रुटि सुधार , डायवर्सन जैसे साधारण कार्यों के लिए दो से तीन वर्षों तक चक्कर काटने को मजबूर हैं।
कलेक्टर द्वारा हाल ही में समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि नामांतरण, सीमांकन, डायवर्सन और अन्य राजस्व प्रकरणों का समय-सीमा में प्राथमिकता से निराकरण किया जाए, लेकिन छुरा क्षेत्र में हालात इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रहे हैं। यहां के राजस्व कार्यालयों में लंबित मामलों का अंबार लगा हुआ है और जिम्मेदार अधिकारी इस ओर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि एक साधारण फौती (मृत्यु उपरांत नामांतरण) के लिए महीनों नहीं बल्कि सालों लग जाते हैं। कई मामलों में आवेदक बार-बार दस्तावेज जमा करने के बाद भी सिर्फ “जांच जारी है” का जवाब सुनते हैं। त्रुटि सुधार और खाता विभाजन जैसे मामलों में भी अनावश्यक देरी आम बात हो गई है।ग्रामीणों का आरोप है कि बिना “सिफारिश” या “दबाव” के फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। इससे न केवल लोगों का समय और पैसा बर्बाद हो रहा है, बल्कि शासन की योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी छुरा तहसील और अनुविभागीय कार्यालय में कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय हो रही है या फिर आदेश केवल कागजों तक सीमित हैं। कुछ ही दिन पहले एक पटवारी का काम करने के बदले पैसे और ठंढी बियर का मांग करते विडियो आडियो वायरल हुआ था जिसमें पटवारी के द्वारा तहसीलदार और आर आई तक पैसा पहुंचाने की बात कही गई थी जिस पर गरियाबंद कलेक्टर ने छुरा तहसीलदार और आर आई को तीन दिनों में जबाब देने का नोटिस जारी किया गया था और पटवारी को निलंबित किया था लेकिन आगे क्या जवाब दिया गया और क्या कार्यवाही हुई ये पता नहीं चल पाया।अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस लापरवाही पर क्या ठोस कार्रवाई करता है और क्या आम जनता को राजस्व सेवाओं में राहत मिल पाती है या नहीं ये आने वाले दिनों में ही पता चल पाएगा।


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