नगरी में रात होते ही दौड़ रही अवैध रेत से भरी हाईवा, राजस्व को लाखों का नुकसान

नगरी में रात होते ही दौड़ रही अवैध रेत से भरी हाईवा, राजस्व को लाखों का नुकसान

नगरी :नगरी क्षेत्र में इन दिनों अवैध रेत कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। हालात यह हैं कि रात होते ही सड़कों पर रेत से भरी हाईवा वाहनों की लंबी कतार दिखाई देने लगती है। आरोप है कि बिना रॉयल्टी और पीट पास के खुलेआम रेत परिवहन किया जा रहा है, जिससे शासन को रोजाना लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। वहीं जिम्मेदार अधिकारियों पर छोटे वाहनों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति करने और बड़े माफियाओं को नजरअंदाज करने के आरोप लग रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगरी ब्लॉक में फिलहाल कोई वैध रेत खदान संचालित नहीं है, इसके बावजूद क्षेत्र में बड़ी संख्या में हाईवा वाहन रेत और गिट्टी का परिवहन कर रहे हैं। बावजूद इसके प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ ट्रैक्टरों तक सीमित नजर आ रही है, जबकि बड़े वाहन बेखौफ होकर अवैध परिवहन में लगे हुए हैं।

सलेरिया नदी बनी अवैध खनन का केंद्र

जानकारी के मुताबिक गट्टासिल्ली क्षेत्र के बगरूमनाला गांव स्थित सलेरिया नदी इन दिनों अवैध रेत खनन का बड़ा केंद्र बन गई है। वनांचल क्षेत्र होने का फायदा उठाकर यहां रात के समय चैन माउंटेन मशीनों के जरिए रेत निकालकर हाईवा में भरी जा रही है। नदी तक पहुंचने के लिए बाकायदा रास्ता भी तैयार किया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रातभर यहां हाईवा वाहनों की आवाजाही बनी रहती है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई नजर नहीं आती।

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निर्माण कार्यों में खपाई जा रही रेत

क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से गणेश घाट सिहावा और साकरा केनाल में नहर मरम्मत कार्य चल रहा है। इन निर्माण कार्यों में बड़ी मात्रा में रेत का उपयोग किया जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि निर्माण स्थलों तक पहुंच रही रेत कहां से लाई जा रही है और उसका वैध रॉयल्टी दस्तावेज मौजूद है या नहीं।

स्थानीय लोगों की मांग है कि निर्माण स्थलों पर डंप रेत की जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि रेत वैध रूप से खरीदी गई है या अवैध परिवहन के जरिए लाई गई है। यदि मामले की निष्पक्ष जांच हो तो अवैध रेत कारोबार की पूरी परत खुल सकती है।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

लगातार अवैध परिवहन की शिकायतों के बावजूद बड़े वाहनों पर कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो अवैध खनन से न सिर्फ राजस्व का नुकसान बढ़ेगा बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंचेगी।








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