वैसे सहफसली की खेती आज के समय में किसानो के लिए एक बेहतर और लाभदायक विकल्प बनती जा रही है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान अपनी उपज को जल्दी बाजार में बेचकर तुरंत आय प्राप्त कर सकते हैं. हालांकि, इस खेती को करने के लिए सही देखभाल बेहद जरूरी होती है. विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में फसलों को अधिक पानी और सुरक्षा की आवश्यकता होती है. ताकि, उत्पादन प्रभावित न हो यही कारण है कि किसान एक ही खेत में टमाटर व खरबूजे कि फसले उगा रहे हैं. इससे लागत भी कम होती है और मुनाफा बढ़ता है. यह तरीका जमीन की उर्वरता को भी बनाए रखता है और जोखिम को कम करता है, जिससे किसानों को एक ही लागत में डबल मुनाफा हो रहा है. जिले के इस किसान ने सहफसली की खेती कर उन्हें लागत के हिसाब से अच्छा मुनाफा हो रहा है, जिसके लिए वह कई सालों से फल व सब्जियों की खेती कर रहे हैं. जनपद बाराबंकी के फतहाबाद गांव के रहने वाले प्रगतिशील किसान श्याम कुमार पारंपरिक खेती के मुकाबले सहफसली की खेती की शुरुआत की जिसमें उन्हें अच्छा फायदा देखने को मिला. आज वह करीब डेढ़ बीघे में खरबूजा टमाटर की खेती कर एक फसल पर 60 से 70 हजार रुपए मुनाफा कमा रहे हैं.
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एक बीघे में 60 से 70 हजार रुपये तक का मुनाफा
सहफसली खेती करने वाले किसान श्याम कुमार ने बताया वैसे तो हम पारंपरिक फसलों की खेती करते थे पर इधर दो-तीन सालों से सहफसली की खेती कर रहे है. इस समय हमारे पास करीब डेढ़ बीघे में टमाटर वह खरबूजा लगा हुआ है. निकल भी रहा है अच्छे रेट में जा भी रहा है, इसमें हम लागत की बात करें तो एक बीघे में 10 से 12 हजार रूपए आती है. वही मुनाफ़ा करीब एक फसल पर हमें 60 से 70 हजार रुपये तक हो जाता है. इसकी खेती हम मल्च विधि से करते इस तकनीक से करने से एक तो खरपतवार का जमाव कम होता है और फसल में रोग लगने का खतरा कम रहता है. सहफसली की खेती करने में एक फायदा यह भी है की एक ही लागत में दो फसले तैयार हो जाती हैं.
अगर एक फसल खराब हो गई तो हमारी लागत दूसरी फसल से निकल आती है. इसकी खेती करना बहुत ही आसान है पहले खेत की दो-तीन बार गहरी जुताई की जाती है. फिर इसमें वर्मी कंपोस्ट गोबर व अन्य खादों का छिड़काव कर पूरे खेत में बेड बनाकर उस पर हम पन्नी डालकर उसमें दोनों तरफ छेद करके एक तरफ टमाटर के पौधे एक तरफ खरबूजे के बीज की बुवाई की जाती है. फिर वही 15 से 20 दिन बाद जब पौधा बड़ा हो जाता है तब इसकी सिंचाई की जाती है फिर वही करीब 50 से 60 दिन बाद हमारी फसल तैयार हो जाती है जिसको हम बाजारों में बेच सकते हैं.


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