परमेश्वर राजपूत ,गरियाबंद : कलेक्टर उइके की उपस्थिति में 405 तालपत्र पर आधारित पाण्डुलिपि का जियो-टैगिंग पूर्ण कर संरक्षित किया गया।भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय के महत्वपूर्ण पहल ज्ञान भारतम् पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए सर्वेक्षण अभियान का कार्य जिले के 324 ग्राम पंचायतों एवं 6 नगरीय निकायों में लगातार किया जा रहा है। इसी क्रम कलेक्टर बीएस उइके ने जिले के नागरिकों से इस पहल में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा है कि 70 वर्ष या उससे अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों की जानकारी प्रशासन अवगत कराएं। जिसे और व्यवस्थित रूप से सहेज सकें।
इसी तारतम्य में कलेक्टर बीएस उइके ने ग्राम कोईचमुड़ा के 75 वर्षीय डमरूराम नागेश के घर जाकर उड़िया भाषा में लिखे गए दुर्लभ तालपत्रों का निरीक्षण किया, जो उनके परदादा विद्याधर मांझी द्वारा लिखित लगभग एक सदी पूर्व रखे गए थे। उन्होंने बताया कि उनके यहां हस्तलिखित 367 पन्नों पर आधारित 6 अलग-अलग खंडों के तालपत्रों में ज्योतिष शास्त्र जिसमें 122 पेज, बीजगणित मंत्र 68 पेज, हरिशचंद्र व्रत कथा 44 पेज, वास्तुशास्त्र (शुभ-अशुभ) 53 पेज, हनुमान प्रसंग 50 पेज एवं हरिश्चंद्र (चक्रव्यूह से व्याधि हटाने का मंत्र) 30 पेज से संबंधी महत्वपूर्ण तालपत्र अभिलेख शामिल है। उन्होंने बताया कि उनके बाप-दादा पुराने समय में इसी अभिलेख के आधार पर विभिन्न कार्यों पर विचार किया जाता था। यह तालपत्र उन्होंने सहेजकर रखा है। वर्तमान में भी काफी लोग उनके पास इसी अभिलेख के आधार पर विचार-विमर्श कराने पहुंचते है। श्री नागेश ने बताया कि इन तालपत्रों का पूजा-अर्चना भी करते है। उन्होंने बताया कि यह तालपत्र उनके लिए अविस्मरणीय एवं अत्यंत मूल्यवान है।
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इसी प्रकार उइके ने ग्राम गोडरबाय के दशमुराम के घर पहुंचकर उनके पास रखे 38 पेज का हस्तलिखित तालपत्र का अवलोकन किया। जिसमें चिकित्सा संबंधित जानकारी उड़िया भाषा में लिखित है। जिसमें सर्प, बिच्छू, कुत्ता काटने, श्वास, हड्डी रोग सहित अन्य बिमारियों के उपचार के बारे में लिखा गया है। इसी चिकित्सा शास्त्र के आधार पर वे लोगों का उपचार आज भी करते है।
कलेक्टर बीएस उइके की उपस्थिति में आज 405 तालपत्र की पांडुलिपि को संरक्षण की दृष्टि से जियो-टैग किया गया। कलेक्टर ने इस धरोहर को जिले की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए इसके संरक्षण, डिजिटल प्लेटफॉर्म में और शोध के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी प्राचीन पांडुलिपियाँ हमारे इतिहास, विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान को समझने का महत्वपूर्ण आधार हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
कलेक्टर ने कहा कि सर्वेक्षण प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक है और इसमें भाग लेने से पांडुलिपियों के स्वामित्व पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने मठ, मंदिर, पुजारी, बैगा, चिकित्सक, साहित्यकार, पत्रकार, जन प्रतिनिधियों सहित आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि इस अभियान में सहयोग करते हुए हस्तलिखित पांडुलिपि के बारे में अवश्य जानकारी दें। इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर सुश्री नेहा भेड़िया, जनपद पंचायत सीईओ के एस नागेश सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।


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