बिलासपुर : छत्तीसगढ़ बिलासपुर प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट ने आरटीई शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों के पढ़ाई के एवज में राज्य शासन द्वारा दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाने की मांग करते हुए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने 19 सितबंर 2025 को इस पर समुचित निर्णय लेने का आदेश जारी किया था। याचिकाकर्ता प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट ने न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।
मामले की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई। याचिका की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जवाब पेश करने के लिए स्कूल शिक्षा सचिव को तीन सप्ताह की मोहलत दी है।
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याचिकाकर्ता बिलासपुर प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट ने अपनी याचिका में कहा है, 14 साल से RTE के बच्चों की प्रतिपूर्ति राशि में किसी तरह की कोई वृद्धि राज्य सरकार ने नहीं की है। साल 2011 से राज्य सरकार द्वारा RTE के बच्चों की प्रतिपूर्ति राशि मात्र 7000 रुपए दी जा रही है, जो बहुत कम है। याचिका के अनुसार दूसरे राज्यों में यह राशि ज्यादा है। याचिकाकर्ता ने प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग की थी।
एक मार्च से चल रहा असहयोग आंदाेलन
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के आदेश के परिपालन की मांग करते हुए छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने 1 मार्च 2026 से असहयोग आंदोलन शुरू किया है। इसके तहत सरकार के किसी भी पत्र या नोटिस का जवाब नहीं दिया जा रहा है। आरटीई के तहत बच्चों को एडमिशन ना देने का निर्णय लिया है।
हाई कोर्ट ने भी प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने को कहा
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया, बीते 14 साल से शिक्षा के अधिकार कानून के तहत दी जाने वाली राशि में राज्य सरकार द्वारा किसी तरह की कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसका विरोध प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट कर रहा है। साल 2011 में जितने भी प्राइवेट स्कूल में आरटीई के बच्चे एडमिशन लिए उन्हें कक्षा पहली से लेकर पांचवी तक 7 हजार रुपए दिए गए। छठवीं से आठवीं तक साढ़े सात हजार रुपए तय किए गए थे। प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाने के लिए हम 14 साल से संघर्ष कर रहे हैं। जुलाई 2025 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई 19 सितंबर 2025 को आई जिसमें कोर्ट ने कहा कि 6 महीने के अंदर प्राइवेट स्कूल के आवेदन पर विचार किया जाए और इनकी प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाई जाए।
इस तरह राशि बढ़ाने कर रहे मांग
शिक्षा के अधिकार कानून के तहत स्कूलों को प्रदाय की जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि राशि प्रति विद्यार्थी, प्रति वर्ष प्राथमिक कक्षाओं में 7000 से बढ़कर 18000, माध्यमिक की 11,500 से बढ़ाकर 22,000 एवं हाई और हायर सेकंडरी की अधिकतम सीमा को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 तक किया जाए। तथा बढ़ी हुई राशि बीते 3 वर्षों से प्रदान की जाये।


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