Strait of Hormuz पर बढ़ा तनाव: Iran का 14 सूत्रीय प्रस्ताव, United States को 30 दिन का अल्टीमेटम

Strait of Hormuz पर बढ़ा तनाव: Iran का 14 सूत्रीय प्रस्ताव, United States को 30 दिन का अल्टीमेटम

नई दिल्ली :  पश्चिम एशिया में तनाव घटाने और बेहद अहम रणनीतिक समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के प्रयासों के तहत ईरान ने अमेरिका को 14 सूत्रीय जवाबी शांति प्रस्ताव भेजकर कूटनीतिक पहल तेज कर दी है।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से वाशिंगटन तक पहुंचाया गया है, जिसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की बात कही गई है। अमेरिका जहां दो महीने के युद्धविराम की वकालत कर रहा है, वहीं ईरान ने स्पष्ट किया है कि समाधान 30 दिनों के भीतर होना चाहिए।

तेहरान का जोर केवल युद्धविराम बढ़ाने के बजाय स्थायी शांति पर है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि प्रथम²ष्टया वह इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि वह प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे, लेकिन इसे स्वीकार करना मुश्किल लगता है क्योंकि ईरान ने अब तक पूरी कीमत नहीं चुकाई है।

ट्रंप ने चेताया कि अगर ईरान दु‌र्व्यवहार करता है तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है और सैन्य विकल्प अभी भी खुले हैं। क्षेत्रीय हालात भी नाजुक बने हुए हैं। इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम डगमगा रहा है और इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के 11 कस्बों और गांवों के निवासियों को एक किलोमीटर दूर हटने की चेतावनी दी है।

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एएनआइ के अनुसार, अमेरिका की नौ सूत्रीय योजना के जवाब में ईरान ने कई अहम मांगें रखी हैं- जैसे सैन्य हमले की गारंटी खत्म करना, क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी, फ्रीज संपत्तियों की रिहाई और आर्थिक प्रतिबंध हटाना।

साथ ही होर्मुज में आवाजाही के लिए नए तंत्र का प्रस्ताव भी दिया गया है।ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने इसे स्थायी समाधान की दिशा में कदम बताते हुए कहा कि अब फैसला अमेरिका को करना है- कूटनीति या टकराव।

वहीं रिवोल्यूशनरी गार्ड की खुफिया इकाई ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका को असंभव युद्ध और खराब समझौते में से चुनना होगा।सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मतभेद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका शुरुआत में ठोस आश्वासन चाहता है, जबकि ईरान पहले प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है।

इस बीच ईरान ने साफ किया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर युद्ध-पूर्व स्थिति में लौटने को तैयार नहीं है। संसद उपाध्यक्ष अली निकजाद ने कहा कि होर्मुज ईरान का है और अन्य देशों के जहाज टोल देकर गुजर सकते हैं, जबकि अमेरिका और इजरायल के जहाजों पर रोक रहेगी।

ट्रंप के 'समुद्री डकैती' वाले बयान पर ईरान नाराज रायटर के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान की तीखी निंदा की है, जिसमें उन्होंने ईरानी जहाजों को जब्त करने की कार्रवाई को “समुद्री डकैती'' जैसा बताया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि यह कोई जुबानी चूक नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के उल्लंघन की खुली स्वीकारोक्ति है।

बकाएई ने 'एक्स' पर लिखा कि अमेरिका का यह रवैया वैश्विक समुद्री नियमों के लिए गंभीर खतरा है और इसे सामान्य नहीं बनने दिया जा सकता। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, उसके सदस्य देशों और महासचिव से अपील की कि ऐसे स्पष्ट उल्लंघनों को सख्ती से खारिज किया जाए।

बता दें कि ट्रंप ने फ्लोरिडा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के दौरान “समुद्री लुटेरों की तरह'' काम किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने जहाज, उसका माल और तेल अपने कब्जे में लिया और इसे काफी लाभदायक बताया।

परमाणु मुद्दे पर इटली ने ईरान को चेताया

एपी के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पश्चिम एशिया में जारी गतिरोध को लेकर ओमान और इटली के अपने समकक्षों से बात की। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल बुसाइदी ने अराघची के साथ अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की समीक्षा की।

वहीं, इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने ईरान के परमाणु मुद्दे को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया। अराघची से फोन पर बातचीत के बाद ताजानी ने एक्स पर लिखा कि इटली के लिए ईरान का सैन्य परमाणु कार्यक्रम एक रेड लाइन है क्योंकि इससे क्षेत्र में परमाणु हथियारों की होड़ बढ़ेगी। इसके अलावा उन्होंने हिजबुल्ला को इजरायल पर हमले करने से रोकने के लिए ईरान के प्रभाव के इस्तेमाल पर भी जोर दिया और कहा कि लेबनान में बातचीत के जरिये शांति बहाल की जाए।








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