छुरा क्षेत्र में पटवारियों की कथित रिश्वतखोरी से किसानों में आक्रोश, लाखों की अवैध उगाही के आरोप—क्या लगेगा लगाम?

छुरा क्षेत्र में पटवारियों की कथित रिश्वतखोरी से किसानों में आक्रोश, लाखों की अवैध उगाही के आरोप—क्या लगेगा लगाम?

परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद/छुरा:राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार और पटवारियों की कथित अवैध उगाही एक बार फिर सुर्खियों में है। छुरा क्षेत्र के पटवारी हल्का नंबर 31 में किसानों से उनके राजस्व संबंधी कार्यों के बदले भारी रिश्वत की मांग किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। किसानों का आरोप है कि हाल ही में उन लोगों से लाखों रुपये तक की मांग की गई, जिसमें कुछ किसानों ने मजबूरी में रकम दे दी, जबकि कई अब भी भुगतान नहीं कर पाए हैं।

किसानों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि यदि वे खुलकर सामने आते हैं तो उनके जरूरी काम अटक सकते हैं और भविष्य में खेती-किसानी से जुड़े कार्यों में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि जमीन संबंधी नामांतरण, सीमांकन, नक्शा सुधार जैसे सामान्य कार्यों के लिए भी अनावश्यक रूप से पैसे की मांग की जा रही है।

मामले को और गंभीर बनाते हुए कुछ किसानों ने यह भी दावा किया है कि पटवारियों द्वारा ली जा रही राशि कथित तौर पर विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है। हालांकि इस दावे की पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है और निष्पक्ष जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी।

इधर, पाट सिवनी में आयोजित सुशासन शिविर के दौरान क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य लेखराज धुर्वा ने भी सार्वजनिक मंच से हीराबतर के एक किसान से पटवारी द्वारा मोटी रिश्वत मांगने का मुद्दा उठाया। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में छुरा क्षेत्र के ही एक पटवारी को रिश्वतखोरी और एक किसान से ठंडी बीयर की मांग करने के आरोप में निलंबित किया गया था। इसके बावजूद क्षेत्र में इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आना यह संकेत देता है कि विभागीय स्तर पर सख्ती के बावजूद जमीनी हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है।

स्थानीय किसानों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो किसानों का विश्वास प्रशासन से उठ सकता है। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेते हैं और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, छुरा क्षेत्र के किसानों में भय और आक्रोश दोनों का माहौल बना हुआ है।








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