वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर अपरा एकादशी व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है।धार्मिक मान्यता के अनुसार, अपरा एकादशी व्रत करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा से बिगड़े काम पूरे होते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन वर्जित कामों को करने से जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि अपरा एकादशी के दिन क्या करें और क्या न करें?
अपरा एकादशी के दिन क्या करें?
अपरा एकादशी के दिन क्या न करें?
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कब है अपरा एकादशी 2026?
वैदिक पंचांग के अनुसार, अपरा एकादशी व्रत 13 मई को किया जाएगा।
एकादशी की तिथि की शुरुआत- 12 मई को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट पर
एकादशी की तिथि का समापन- 13 मई को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट पर
अपरा एकादशी का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में अपरा एकादशी को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत को करने से जाने-अनजाने में किए गए सभी पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही साधक को पुण्य फल की प्राप्ति होती है।


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