कभी-कभी हम करीबियों या दोस्तों को अपनी सारी बातें बता देते हैं, जो आगे चलकर हमारे लिए नुकसान का कारण बनती हैं। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में ऐसी कई बातों का जिक्र किया है, जिनका ढोल नहीं पीटना चाहिए यानी उन्हें गुप्त रखना चाहिए, वरना व्यक्ति अपना ही नुकसान कर बैठता है। चलिए जानते हैं कि इस बारे में चाणक्य की नीति क्या कहती है।
इन बातों को बताने से होता है नुकसान
श्लोक 1 - अर्थनाशं मनस्तापं गृहिण्याश्चरितानि च।
नीचं वाक्यं चापमानं मतिमान्न प्रकाशयेत्॥
चाणक्य नीति का यह श्लोक जीवन में गोपनीयता और समझदारी के महत्व को बताता है। इस श्लोक में कहा गया है कि बुद्धिमान (मतिमान) व्यक्ति को अपनी इन पांच बातों को दूसरों के सामने प्रकट नहीं करना चाहिए, फिर चाहे वह व्यक्ति आपके कितना ही करीब क्यों न हो -
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न पीटें इस बात का ढिंढोरा
श्लोक 2 - मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा नैव प्रकाशयेत् ।
मन्त्रेण रक्षयेद् गूढं कार्ये चापि नियोजयेत् ॥
इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को मन में सोचे गए कार्य को कभी भी किसी के सामने प्रकट नहीं करना चाहिए। ऐसे में व्यक्ति को अपनी योजना को हमेशा गुप्त रखना चाहिए, ताकि उस कार्य की सफलता सुनिश्चित हो सके।


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