बैंक FD से ज्यादा रिटर्न दे रही ये खेती, 25 हजार लगाकर बनें आत्मनिर्भर

बैंक FD से ज्यादा रिटर्न दे रही ये खेती, 25 हजार लगाकर बनें आत्मनिर्भर

अगर आप भी बागवानी से अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो यह खेती आपके लिए किसी “फिक्स डिपॉजिट” से कम नहीं है। हम बात कर रहे हैं कटहल की खेती की, जिसमें एक बार निवेश करने के बाद कई सालों तक लगातार कमाई होती रहती है. कटहल एक ऐसी फसल है जिसे फल और सब्जी दोनों रूपों में इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए इसकी बाजार में हमेशा मांग बनी रहती है. कटहल की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें शुरुआती लागत कम होती है और रखरखाव भी ज्यादा मुश्किल नहीं होता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 25 हजार रुपए की लागत में इसकी शुरुआत की जा सकती है और सही देखभाल के साथ हर साल 2.5 से 3 लाख रुपए तक की कमाई संभव है. खास बात यह है कि एक बार लगाए गए पेड़ कई वर्षों तक फल देते रहते हैं.

कृषि सलाहकार नवनीत रेवापार्टी बताते हैं कि आज के समय में सिर्फ पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो गया है. मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और सही दाम न मिलने की समस्या के बीच पेड़ों की खेती किसानों के लिए एक सुरक्षित और समझदारी भरा विकल्प बनकर उभर रही है. कटहल की खेती इसी दिशा में एक बेहतरीन उदाहरण है. वे बताते हैं कि एक बार पौधे लगाने के बाद किसान 60 से 70 साल तक नियमित आय प्राप्त कर सकते हैं. यानी एक पीढ़ी की मेहनत से लगाया गया बाग आने वाली दो पीढ़ियों के लिए भी कमाई का मजबूत जरिया बन सकता है. यही वजह है कि इसे “लंबी अवधि का निवेश” भी कहा जाता है.

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बाजार में उपलब्ध हाइब्रिड किस्में
कटहल का पौधा सामान्यतः 6 से 7 साल में फल देना शुरू करता है, लेकिन अब बाजार में उपलब्ध हाइब्रिड किस्में 2 से 3 साल में ही उत्पादन देने लगती हैं. एक परिपक्व पेड़ से हर साल 80 से 200 तक फल मिल सकते हैं. बाजार में एक कटहल की कीमत 100 से 200 रुपए या उससे अधिक तक हो सकती है, जिससे एक पेड़ से ही 30 से 40 हजार रुपए तक की कमाई संभव है.

अगर किसान बड़े स्तर पर इसकी बागवानी करते हैं, तो सालाना लाखों रुपए का मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं. खास बात यह है कि कटहल की खेती पथरीली और आंशिक बंजर जमीन पर भी सफलतापूर्वक की जा सकती है, जिससे खाली पड़ी जमीन को भी आय का जरिया बनाया जा सकता है.

कटहल की खासियत क्या है
इस फसल में सिंचाई और रासायनिक खाद की जरूरत भी अपेक्षाकृत कम होती है. किसान देसी या उन्नत (हाइब्रिड) किस्मों का चयन कर सकते हैं. शुरुआती समय में पौधों की देखभाल जरूरी होती है, लेकिन बाद में पेड़ मजबूत हो जाते हैं. जैविक खाद के उपयोग से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर होते हैं. कटहल की खासियत यह भी है कि इसका सिर्फ फल ही नहीं, बल्कि इसकी लकड़ी भी काफी कीमती होती है, जिसका उपयोग फर्नीचर और निर्माण कार्यों में किया जाता है. यानी यह फसल पूरी तरह बहुउपयोगी है.

आज के समय में जब किसान आय के नए और सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं, तब कटहल की खेती एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आ रही है. सही तकनीक, उचित दूरी, समय-समय पर देखभाल और बाजार से जुड़ाव के साथ यह खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे सकती है.








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