प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी गड़बड़ी के आरोप, सुशासन तिहार में फूटा जनता का आक्रोश

प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी गड़बड़ी के आरोप, सुशासन तिहार में फूटा जनता का आक्रोश

 

पक्के मकान वालों को मिला लाभ, गरीब परिवार सूची से बाहर — कई वार्डों में पक्षपात व आवास किराए पर देने के आरोप


परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद /छुरा : नगर पंचायत छुरा में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को लेकर गंभीर अनियमितताओं और पक्षपात के आरोप सामने आने के बाद सुशासन तिहार के दौरान लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया। स्थानीय नागरिकों एवं विभिन्न वार्डों के रहवासियों ने योजना के चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।वार्डवासियों का आरोप है कि योजना के वास्तविक पात्र गरीब परिवारों को लाभ से वंचित कर ऐसे लोगों को आवास स्वीकृत कर दिया गया जिनके पास पहले से पक्के मकान मौजूद हैं। इतना ही नहीं, कुछ ऐसे लोगों के नाम भी सूची में शामिल किए गए जिन्हें पूर्व में इंदिरा आवास योजना का लाभ मिल चुका है। नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ परिवारों में एक ही मकान या परिवार के तीन-चार सदस्यों के नाम पर अलग-अलग आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिससे योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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सुशासन तिहार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि गरीबी रेखा राशन कार्ड होने के बावजूद कई जरूरतमंद परिवारों के नाम सूची से बाहर कर दिए गए। जिसे लेकर लोगों ने पक्षपात और अनियमितता के आरोप लगाए तथा कहा कि पात्र हितग्राहियों के साथ अन्याय हुआ है।स्थानीय लोगों के अनुसार वार्ड क्रमांक 6, 8, 12 और 14 के कई पात्र परिवारों को कथित रूप से योजना की सूची में शामिल नहीं किया गया, जबकि वार्ड क्रमांक 1 में जिम्मेदार व्यक्ति का निवास होने के कारण परिचितों और समर्थकों को अधिक संख्या में आवास स्वीकृत किए जाने की चर्चा पूरे नगर में बनी हुई है। इससे योजना की निष्पक्षता और चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

इसके अलावा कुछ हितग्राहियों द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राप्त मकानों को किराए पर दिए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। नागरिकों का कहना है कि जिन लोगों को आवास जरूरतमंद गरीबों के लिए दिए गए थे, वे अब किराएदारी का माध्यम बनते जा रहे हैं, जो योजना की मूल भावना के विपरीत है।नगरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की संपूर्ण सूची सार्वजनिक की जाए, पात्रता की दोबारा जांच कराई जाए, छूटे हुए वार्डों का पुनः सर्वे कराया जाए तथा किराए पर दिए गए आवासों की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे कलेक्टर कार्यालय से लेकर शासन स्तर तक शिकायत करेंगे और आंदोलन करने के लिए भी बाध्य होंगे। नगर में इस मामले को लेकर लगातार चर्चाओं का दौर जारी है तथा लोग प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।








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