हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत की बड़ी महिमा बताई जाती है। कहते हैं इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ये व्रत साल में दो बार आता है। एक बार ज्येष्ठ अमावस्या पर तो दूसरी बार ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन। लेकिन ज्येष्ठ अमावस्या वाला वट सावित्री व्रत ज्यादा लोकप्रिय है जो इस बार 16 मई 2026, शनिवार को पड़ रहा है। ये व्रत मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और उड़ीसा की महिलाएं रखती हैं। इस व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा का विधान है। यहां हम आपको बताएंगे वट सावित्री व्रत रखा कैसे जाता है।
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वट सावित्री व्रत कैसे रखा जाता है
वट सावित्री व्रत का पारण कब किया जाता है
वट सावित्री व्रत का पारण पूजा के बाद कभी भी किया जा सकता है। जैसे अगर आपने सुबह 11 बजे के करीब पूजा कर ली है तो इसके बाद आप अपना व्रत खोल सकती हैं। जो महिलाएं शाम में पूजा करती हैं तो वो शाम में ही व्रत खोलती हैं।


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