वास्तु शास्त्र में मोरपंख को बेहद पवित्र माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट की शोभा बढ़ाने वाला मोरपंख घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सुख-समृद्धि लाता है।यही वजह है कि लोग इसे अपने घरों में लगाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु नियमों के अनुसार, मोरपंख रखने की भी एक सही दिशा और स्थान होता है?अगर इसे घर की गलत जगहों पर रख दिया जाए, तो यह फायदे की जगह भारी नुकसान और गृह क्लेश की वजह बन सकती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि घर के उन जगहों के बारे में, जहां भूलकर भी मोरपंख नहीं रखना चाहिए।
बाथरूम या टॉयलेट की दीवार पर
वास्तु शास्त्र के अनुसार, बाथरूम या टॉयलेट में सबसे अधिक राहु और नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। अगर आपके बेडरूम या लिविंग रूम की कोई दीवार बाथरूम से सटी हुई है, तो उस दीवार पर भूलकर भी मोरपंख न लगाएं। ऐसा करने से मोरपंख की सकारात्मकता खत्म हो जाती है और घर में बीमारियां बढ़ने लगती हैं।
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कबाड़घर या अंधेरे कोनों में
मोरपंख को हमेशा साफ-सुथरी और हवादार जगह पर रखना चाहिए। घर का स्टोर रूम, कबाड़ रखने की जगह या एकदम अंधेरे कोनों में मोरपंख रखने से घर में वास्तु दोष उत्पन्न होता है। साथ ही इससे परिवार के सदस्यों की तरक्की रुक जाती है और कारोबार में लगातार घाटा होने लगता है।
तिजोरी या धन स्थान
लोग अक्सर धन वृद्धि के लिए तिजोरी के पास मोरपंख रखते हैं, जो कि सही है, लेकिन ध्यान रहे, मोरपंख कभी भी तिजोरी के अंदर कबाड़ के साथ या तिजोरी के ठीक नीचे फर्श के पास नहीं होना चाहिए। मोरपंख को हमेशा तिजोरी के ऊपर या उसके ठीक सामने इस तरह रखें कि उस पर रोशनी पड़ती रहे, वरना पैसा बेवजह धीरे-धीरे खर्च होने लगता है।
दक्षिण दिशा की दीवार पर
वास्तु में दक्षिण दिशा को यम और पितरों की दिशा माना गया है। इस दिशा में मोरपंख लगाने से घर में भय, तनाव और मानसिक अशांति का माहौल बनता है। मोरपंख रखने के लिए सबसे सही दिशा पूर्व या उत्तर-पश्चिम मानी गई है।
मुख्य द्वार के ठीक नीचे
मोरपंख को हमेशा ऊंचाई पर लगाना चाहिए। इसे कभी भी घर के मुख्य द्वार के निचले हिस्से में या ऐसी जगह न लगाएं जहां आते-जाते समय इस पर किसी के पैर लगें या झाड़ू की धूल पड़े। मोरपंख का अनादर सीधे तौर पर दुर्भाग्य को बुलावा देता है।


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