सनातन धर्म में गंगाजल को अमृत के समान माना गया है। गंगा दशहरा के पावन पर्व पर गंगाजल का उपयोग ज्योतिषीय दोषों को शांत करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। यदि आप लंबे समय से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, या राहु-केतु के बुरे प्रभावों से परेशान हैं, तो गंगाजल आपकी इन समस्याओं को दूर कर सकता है।
शनि दोष से मिलेगी राहत
यदि आपकी कुंडली में शनि भारी हैं या आर्थिक उन्नति रुकी हुई है, तो गंगा दशहरा के दिन ये सुबह जल्दी उठकर एक लोटे में गंगाजल लें, उसमें थोड़ा-सा काला तिल और कच्चा दूध मिलाएं। इसे पीपल के पेड़ की जड़ में अर्पित कर दें। मान्यता है कि इससे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का बुरा प्रभावों कम किया जा सकता है।
अगर आपके घर के पास कोई शनि मंदिर है, तो गंगा दशहरा के दिन वहां जाकर गंगाजल में सरसों के तेल में कुछ बूंदें मिलाएं और शनि देव की शिला (मूर्ति) पर अर्पित करें। यह उपाय शनि से संबंधित कष्टों को दूर करने के लिए बहुत प्रभावी माना गया है।
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गंगा दशहरा पर सूर्यास्त के समय अपने घर के मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों ओर गंगाजल का छिड़काव करें। ऐसा करने से शनि के कारण आ रही आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
राहु और केतु दोष को शांत करने के तरीके
कुंडली में राहु-केतु दोष होने पर जीवन में अचानक मानसिक तनाव, अज्ञात भय और गृह क्लेश लेकर आते हैं। इन्हें शांत करने के लिए आप गंगा दशहरा पर गंगाजल के उपयोग से ये काम कर सकते हैं -
राहु और केतु के दोषों को दूर करने के लिए गंगा दशहरा के दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार, तांबे या चांदी के लोटे में गंगाजल भरें और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करते हुए शिवलिंग पर चढ़ाएं। यह राहु और केतु के दोषों को दूर करने के सबसे अचूक उपाय माना गया है।
अगर आप गंगा दशहरा के पावन अवसर पर किसी कारणवश गंगा नदी में स्नान करने नहीं जा सकते, तो निराश न हों। अपने घर पर ही सामान्य स्नान के पानी में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इससे राहु के कारण होने वाला मानसिक भ्रम और अज्ञात भय दूर होता है।
राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए गंगा दशहरा के दिन पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। विशेषकर घर के उन कोनों में गंगाजल जरूर छिड़कें जहाँ अंधेरा रहता है या नकारात्मक ऊर्जा जल्दी जमा होती है।
गंगा दशहरा पर ध्यान रखें ये जरूरी बातें
उपायों का पूरा फल तभी मिलता है जब उन्हें सही नियम और सेवा भाव के साथ किया जाए।
कोई भी उपाय तभी कारगर होता है जब आप उसे साफ मन से करें।
इन धार्मिक कार्यों को करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा रखें, किसी के प्रति गुस्सा न करें और न ही किसी को अपशब्द बोलें।
गंगा दशहरा पर गंगाजल के उपायों के साथ-साथ किसी जरूरतमंद व्यक्ति को काले तिल, छाता, हाथ का पंखा या मौसमी फल दान करने से भी आपको शनि देव की कृपा मिल सकती है।

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